अलीगढ़ के रेंजर गौरव सिंह बताते हैं कि विषखपरिया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के अंतर्गत अनुसूची-I में संरक्षण प्राप्त है। बाघ और हाथी आदि संरक्षित वन्यजीव भी इसी श्रेणी में हैं। विषखपरिया का शिकार, व्यापार एवं खरीद-फरोख्त प्रतिबंधित है। इसको पकड़ना, इसके अंग रखना या इसका व्यापार करना गैरकानूनी है। पकड़े जाने पर तीन से सात वर्ष तक का कारावास हो सकता है। अपराध की प्रकृति के अनुसार गैर-जमानती कार्रवाई तक का सामना करना पड़ सकता है। देश में पाए जाने वाले बंगाल मॉनिटर, यलो मॉनिटर, डेसर्ट मॉनिटर और एशियन वाटर मॉनिटर को कानूनी संरक्षण प्राप्त है। जब भी इनके निकलने की कोई सूचना मिलती है तो विभागीय टीम रेस्क्यू कर उन्हें जंगल में छोड़ती है।
अलीगढ़ में एशियाई वाटर मॉनिटर
अलीगढ़ के गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में में एशियाई वाटर मॉनिटर रहते हैं, जो अप्रैल से अक्टूबर के बीच प्रजनन करते हैं। मादाएं एक महीने बाद सड़े हुए तनों या नम मिट्टी में अंडे देती हैं। अंडों का इनक्यूबेशन छह से सात महीने का होता है। जिसके बाद अप्रैल-मई में बच्चे बाहर निकलते हैं, जो गर्मी में सक्रिय रहते हैं। यह जमीन और पानी दोनों जगह रह सकते हैं। बड़े होने पर 10 फीट तक लंबे हो सकते हैं।
नाले बने ठिकाने, यहीं से आबादी में घुस रहे
तेजी से खत्म हुए जंगल और पेड़ों के अंधाधुंध कटान से यह शहरी इलाकों की ओर आ रहे हैं। आवास की कमी और भोजन की तलाश आबादी में इनके आने का मुख्य कारण है। अलीगढ़ के अधिकांश इलाकों में गहरे खुले नाले और सीवर सिस्टम इनके प्राकृतिक आवास बन गए हैं। इन नालों में इन्हें आसानी से चूहें, मेंढक, सड़ा हुआ मांस और कचरा खाने के लिए मिल जाता है। इन्हीं नालों से यह घरों के बाथरूम, बेसमेंट या कूलर-पाइप में छिपकर अंदर तक पहुंच जाते हैं। इसलिए इन दिनों इनके बच्चे कई जगह मिल रहे हैं।