अलीगढ़ शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद के समर्थन में शहरवासी उतर आए हैं। ईदगाह शाहजमाल पर पहुंचे लोगों ने एक स्वर में बोला मोहम्मद खालिद हमीद ही शहर मुफ्ती थे, हैं और रहेंगे भी। दरअसल, 15 अगस्त को मोहम्मद जैद मजाहिरी ने स्वयं को शहर मुफ्ती घोषित कर दिया था। शहर मुफ्ती को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा होने लगी थी।
19 अगस्त को दोपहर तीन बजे शाहजमाल ईदगाह में शहर मुफ्ती, इमाम जुमा सहित मुस्लिमों के सभी जाति के लोग शामिल हुए। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने कहा कि “हम दुनिया में इंसानियत का पाठ पढ़ने के लिए आए हैं। इसलिए जिस व्यक्ति ने खुद को शहर मुफ्ती घोषित किया है, उसे माफ कर दिया है। लोगों से भी अपील करते हैं कि उस व्यक्ति को बुरा-भला न कहें। मैंने उसे माफ कर दिया।
हाजी जहीर कुरैशी ने कहा कि जब तक शहर मुफ्ती जिंदा हैं। यही हमारे मुफ्ती थे, हैं और रहेंगे। जिन लोगों ने अपने आपको शहर मुफ्ती का दावेदार कहा है, वह सबसे माफी मांगें। कर्बला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने कहा कि मोहम्मद खालिद न सिर्फ सुन्नी के बल्कि शिया समुदाय के शहर मुफ्ती हैं। इमाम जामा मस्जिद महमूदुल हसन, एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सलमान इम्तियाज, पूर्व उपाध्यक्ष माजिन जैदी, मुजफ्फर सईद, बाबर इलियास, गुलजार अहमद, मुशर्रफ हुसैन मजहर, जावेद सैफी, हाजी नासिर सैफी, कमालुद्दीन सैफी, इमरान सैफी, अल्वी समाज के अध्यक्ष मुन्ना अल्वी, शहजाद अल्वी, बाबा फरीद आजाद, मुईन कुरैशी, दु आदि मौजूद रहे।
खालिद हमीद ही हैं शहर मुफ्ती : उमैर
ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद के नेशनल हॉस्पिटल पर 15 अगस्त को झंडा फहराने के दौरान कुछ लोगों ने मोहम्मद जैद मजाहिरी को शहर मुफ्ती घोषित किया था। इसके बाद उनके भाई मोहम्मद उमैर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। अब उमैर ने कहा कि मोहम्मद खालिद हमीद ही शहर मुफ्ती हैं। आगे मुफ्ती का पैनल बनाकर शहर मुफ्ती का चुनाव किया जाए।