- दस हजार करीब मोबाइल-टैबलेट रखे हुए एक हैं कमरे में
- पहले बिना सत्यापन कॉलेज की सूची से होता था वितरण
- अब कॉलेज की सूची पर पात्रों के होता सत्यापन, तब वितरण
ये भी खास बातें
- स्वामी विवेकानंद युवा तकनीकी शसक्तिकरण योजना के ये उत्पाद
- ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को देने की प्रदेश सरकार की योजना
ये कहते हैं तकनीकी जानकार
तकनीकी के जानकार कहते हैं इस तरह के उत्पाद कहीं भी बिना नमी के स्थान पर एक वर्ष तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। एक वर्ष में उनकी बैटरी फूलने लगती हैं। नमी अगर उत्पाद तक पहुंच जाए तो खराबी का अंदेशा रहता है।
कॉलेज ने किया कमरा खाली करने का अनुरोध
इधर, डीएस डिग्री कॉलेज के प्रधानाचार्या डा.मुकेश भारद्वाज ने जिला प्रशासन को पत्र भेजा है। जिसमें कहा है कि लंबे समय से उनके यहां मोबाइल और टैबलेट रखे हैं। अब हमें कुछ निर्माण कराने के लिए कमरे की जरूरत है। इसलिए इस कक्ष को खाली कराने का अनुरोध प्रशासन से किया गया है।