आगरा खंड शिक्षक विधान परिषद चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रत्याशी जगवीर किशोर जैन को भले ही शिकस्त मिली हो, लेकिन वह शिक्षकों के हित के लिए जीवन पर्यंत लड़ाई लड़ेंगे। जगवीर किशोर का कहना है कि बिना पद के भी शिक्षकों की सेवा की जा सकती है, वह ऐसा करके दिखाएंगे। चुनाव में मिली हार के कारणों को लेकर अमर उजाला ने उनसे बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश।
सवाल : चुनाव हारने की कौन-सी वजह रही।
जवाब : चुनाव में पूरी तरह से सत्ता का दबाव होना, चुनाव जीतने के जितने हथकंडे हो सकते थे, प्रत्याशियों ने उसे अपनाया। धन बल, बाहुबल का भी जमकर इस्तेमाल हुआ, जो पहले के चुनाव में कभी नहीं था। फिर भी जो जनादेश आया है, उसको मैं स्वीकार करता हूं।
सवाल : इस बार शिक्षकों का समर्थन क्यों नहीं मिल पाया।
जवाब : शिक्षकों का समर्थन मिला है। इससे इनकार नहीं कर सकता हूं, लेकिन जो शिक्षक मुझे वोट करते थे। इस बार वह सत्ता के दबाव में सत्ता के प्रत्याशी के साथ चले गए। वहीं, जिस तरह से एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल ने धन की बौछार की, उससे वित्त विहीन विद्यालय के शिक्षक आकर्षित हो गए। वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों के मत से डॉ. अग्रवाल ने चुनाव जीता है। खासतौर से आगरा के वित्त विहीन विद्यालय के मतदाता उनके साथ रहे।
सवाल : चुनाव हारने के बाद घर पर बैठेंगे या शिक्षकों के लिए संघर्ष करेंगे।
जवाब : हार-जीत चुनाव की एक प्रक्रिया है। हार के बावजूद वह शिक्षकों के हितों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। बिना पद के भी सेवा हो सकती है। यह उदाहरण प्रस्तुत करूंगा।
सवाल : विधान परिषद में 24 साल का अनुभव था। क्या चुनाव हारने से शिक्षकों के हितों को नुकसान होगा।
जवाब : यह तो शिक्षक ही बता सकते हैं। फिर भी मेरा प्रयास होगा कि शिक्षकों के सुख-दुख में हमेशा उनके साथ खड़ा रहा हूं। जिन्होंने मुझे वोट दिया है, उनका बड़े ही विनम्र भाव से आभार प्रकट करता हूं।
सवाल: अब भविष्य की रणनीति क्या होगी।
जवाब : शिक्षकों की सेवा जीवन पर्यंत करता रहूंगा। सरकार जो भी शिक्षक के हित के खिलाफ कदम उठाएगी, उसके खिलाफ संघर्ष करूंगा। आंदोलन करूंगा। धरना दूंगा।