विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन अलीगढ़ में इसकी सियासी आहट सुनाई देने लगी है। सांसद सतीश गौतम के बयानों में पिछले दो साल से दिखाई दे रही हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था की आक्रामक पिच अब विधानसभा स्तर पर भी सुनाई देने लगी है।
कोल विधायक अनिल पाराशर के हालिया बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। 26 अगस्त को एटा चुंगी स्थित कुंवरनगर में एक सभा में वोट मांगते हुए विधायक ने टोपी वालों और योगी के बुलडोजर का जिक्र किया और पिछली सरकारों की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
विधायक ने कहा था कि पहले इंसान तो छोड़िए, जानवर भी सुरक्षित नहीं थे। घर के बाहर खेत में भैंस तक बांधना मुश्किल था। अब योगी के बुलडोजर की वजह से टोपी वालों से अलीगढ़ के लोगों को चैन मिला है।
विधायक ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मौजूदा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए अपने और हिंदुत्व के समर्थन में वोट मांगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी चार से पांच महीने बाकी हैं और भाजपा की ओर से टिकट को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है।
पाराशर का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जून में अतरौली मुठभेड़ के बाद भी उनका एक वीडियो सामने आया था। इसमें उन्होंने लूट के आरोपियों के एनकाउंटर को अल्लाह मियां के पास पहुंचाया कहते हुए इसे योगी-मोदी सरकार की कार्रवाई बताया था। ऐसे में विधायक की यह भाषा सिर्फ एक सभा के बयान तक सीमित नहीं, बल्कि चुनाव से पहले अलीगढ़ की राजनीति में मुद्दों और भाषणों के बदलते मिजाज का संकेत भी मानी जा रही है।
सांसद की पिच पर पहले से चल रही है आक्रामक राजनीति
अलीगढ़ में भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बयानों में हिंदुत्व, मुस्लिम पहचान और कानून-व्यवस्था का मुद्दा नया नहीं है। पिछले दो वर्षों में सांसद सतीश गौतम के कई बयान सुर्खियां बन चुके हैं। अब विधायक अनिल पाराशर का बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या सांसद के बाद विधानसभा स्तर के नेता भी उसी राजनीतिक पिच पर अपनी जगह बना रहे हैं?
टिकट तय नहीं, लेकिन अपनी-अपनी पिच तैयार
अभी भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए टिकट तय नहीं किए हैं। इसके बावजूद नेताओं की सभाओं में आने वाले चुनाव की संभावित भाषा दिखाई देने लगी है। कानून-व्यवस्था, हिंदुत्व और मुस्लिम पहचान जैसे मुद्दे भाषणों में जगह बना रहे हैं। ब्रज प्रांत से जुड़े नेताओं में चर्चा है कि चुनाव से पहले ये भाषा अपने-अपने समर्थक वर्ग को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है।
लेकिन, इसे पार्टी की आधिकारिक चुनावी रणनीति मानना अभी जल्दबाजी होगी। बहरहाल चुनाव का सही समय भले ही सामने न हो, लेकिन उसकी भाषा जरूर सामने आने लगी है। अब अलीगढ़ में अगले कुछ महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नेताओं की यह पिच और कितनी तेज होती है और इसमें स्थानीय मुद्दों, विकास और रोजगार की जगह कितनी बचती है।
विधायक बोले- पहले और अब की कानून-व्यवस्था की तुलना की
कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि उन्होंने पूर्व और वर्तमान की कानून-व्यवस्था की तुलना करते हुए बयान दिया था। पहले की घटनाएं सभी जानते हैं, इसलिए उनका अलग से उल्लेख करने की जरूरत नहीं है।
किसकी कैसी पिच?
. सांसद सतीश गौतम : 17 जुलाई 2026 को खैर में ‘गोल टोपी और लंबी दाढ़ी’ वाले लोगों पर टिप्पणी, सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट का आरोप।
. राज्यमंत्री रघुराज सिंह : 17 अगस्त 2026 को हिंदुत्व समर्थकों के वोट की खुली अपील।
. कोल विधायक अनिल पाराशर : 26 अगस्त 2026 ‘टोपी वालों के डर’ से योगी के बुलडोजर तक की बात इससे पहले एनकाउंटर को ‘अल्लाह मियां के पास’ भेजने वाला बयान।