अलीगढ़ में पहली बार आईएमए के कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स की वार्षिक कॉन्फ्रेंस में आयुर्वेद और होम्योपैथी चिकित्सक को 58 तरह की सर्जरी करने की अनुमति का मामला छाया रहा। देश भर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की। उन्होंने मिक्सोपैथी को चिकित्सा जगत के साथ भद्दा मजाक करार दिया।
कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. आलोक कुलश्रेष्ठ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कॉन्फ्रेंस को सबसे पहले राष्ट्रीय सचिव डॉ. जयेश लेले ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल में मिक्सोपैथी चिकित्सा जगत के साथ भद्दा मजाक है। आईएमए का कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर सरकार की इस नीति का विरोध करता है। इसके खिलाफ देशव्यापी हड़ताल 7, 8 और 9 फरवरी को होगी।
डॉ. राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि सरकार वर्ष 2030 तक आयुर्वेद और होम्योपैथी को 58 तरह की सर्जरी करने की अनुमति पर विचार कर रही है, जिस प्रकार हड्डियों का सर्जन पेट का ऑपरेशन नहीं कर सकता, उसी प्रकार आयुर्वेद और होम्योपैथी चिकित्सक सर्जरी नहीं कर सकते हैं। आयुर्वेद और होम्योपैथी को अभी और शोध की आवश्यकता है। सरकार जल्द बाजी में ऐसा कोई निर्णय न ले, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़े।
उन्होंने बताया कि इस कॉन्फ्रें स में 65 डॉक्टरों को फेलोशिप अवार्ड दिया गया। यह फेलोशिप अवार्ड उन डॉक्टरों को दिया जाता है, जिन्होंने ने 20 साल की प्रैक्टिस अवधि पूरी कर ली हो या जिन्होंने एमबीबीएस के बाद फेलोशिप की परीक्षा पास की हो।
इस मौके पर डॉ. जयंत शर्मा, डॉ. आलोक कुलश्रेष्ठ, डॉ. विपिन गुप्ता, डॉ. शरद अग्रवाल, डॉ. दिव्या चौधरी, डॉ. अशोक राय, डॉ. एसके राजू, डॉ. भरत वार्ष्णेय, डॉ. नितिन, डॉ. अभिषेक, डॉ. विजय पाल, डॉ. आयुष, डॉ. सागर वार्ष्णेय, डॉ. सुवेक वार्ष्णेय, डॉ. रिंकल, डॉ. नेहा, डॉ. रश्मि, डॉ. आरती वार्ष्णेय आदि उपस्थित थे।