उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार राज्य परामर्श दात्री समिति के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) रघुराज सिंह के दो सगे भाइयों सुरेंद्रपाल सिंह व हरिराज सिंह को अपर सत्र न्यायालय-5 की अदालत से सोमवार को जेल भेज दिया गया। दोनों ने 2010 के हमले के एक मुकदमे में अदालत में हाजिर होकर जमानत के लिए अर्जी दायर की थी।
न्यायालय ने जमानत पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर तारीख नियत कर दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। बता दें कि गांव में होली के मौके पर हुए विवाद में फायरिंग के दौरान रघुराज सिंह के पड़ोसी की आंख जख्मी हुई थी और पड़ोसी का बेटा बाल-बाल बच गया था। इसी मुकदमे में दोनों आरोपी हैं।
प्रकरण के अनुसार मूल रूप से कस्बा गभाना निवासी रघुराज सिंह के बड़े भाई तत्कालीन प्रधान पति सुरेंद्रपाल सिंह व छोटे भाई हरिराज सिंह के पड़ोसी महीपाल सिंह व उनके बेटे चंद्रशेखर पर होली के मौके पर मार्च 2010 में बच्चों के झगड़े में हमला हुआ था। इस हमले में फायरिंग में गोली लगने से महीपाल सिंह की आंख जख्मी हो गई थी, जबकि बेटा बाल-बाल बच गया था।
इस हमले के मुकदमे में महिपाल ने सुरेंद्रपाल व हरिराज सहित उनके परिवार के पांच लोग नामजद किए थे। पुलिस विवेचना में सुरेंद्रपाल व हरिराज के नाम निकाल दिए गए और बाकी तीनों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी गई। दौरान-ए-सत्र परीक्षण मुकदमे की सुनवाई एडीजे-5 के न्यायालय में शुरू हुई, जहां महीपाल सिंह ने धारा 319 के तहत दोनों नामजदों के नाम निकाले जाने पर ऐतराज जताते हुए उन्हें तलब करने का अनुरोध अदालत से किया। इस पर न्यायालय ने इन दोनों के खिलाफ समन जारी कर तलब किया।
अदालत के इस तलबी आदेश के खिलाफ यह दोनों हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए। मगर कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट में दोनों की ओर से जमानत अर्जी दायर की गई, वहां से दोनों को एक माह में निचली अदालत में हाजिर होने के निर्देश दिए गए। इसी निर्देश के तहत दोनों सोमवार को अधिवक्ता के माध्यम से जमानत अर्जी दायर करते हुए कोर्ट में हाजिर हुए।
मामले में महीपाल सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रताप सिंह राघव ने बताया कि अदालत ने दोनों को जेल भेजते हुए जमानत पर सुनवाई के लिए 21 तारीख नियत की है। वहीं रघुराज सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि बच्चों के झगड़े में यह हुआ है। उनके भाइयों को गलत नामजद कराया था।