मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी रैली के दौरान साथा चीनी मिल में नई यूनिट लगवाने की घोषणा की थी, लेेकिन आज भी चीनी मिल को अपने उद्धार का इंतजार है। मंगलवार को प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार अलीगढ़ आए, लेकिन बंद पड़ी चीनी मिल की ओर देखना तक उन्होंने मुनासिब नहीं समझा।
सर्किट हाउस के बंद कमरे में विभागीय अफसरों के साथ उन्होंने गुफ्तगू की। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और चीनी मिल की नई यूनिट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) जल्द तैयार कराने का निर्देश देकर लखनऊ रवाना हो गए।
साथा चीनी मिल पांच-छह सालों से गन्ना किसानों के लिए अभिशाप बनी हुई है। मिल की मरम्मत के नाम पर पांच साल में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। इस सत्र में भी शासन स्तर से 85 लाख रुपये भेजे गए थे। वह रुपये कहां गए? इस बारे में मिल प्रबंधन कुछ भी कहने से बच रहा है।
करीब 52 साल पुरानी साथा चीनी मिल की मशीनें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि मिल का संचालन मुश्किल हो गया है। मिल का संचालन समुचित तरीके से न होने से गन्ना किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस सत्र में भी मिल की मरम्मत के लिए सवा करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ था। पहली किस्त का 85 लाख रुपया आ गया और मरम्मत के नाम पर इसे खर्च भी दिखाया जा चुका है।
घट रहा गन्ने का रकबा
कभी गन्ना उत्पादन के अग्रणी जिलों में शामिल रहे अलीगढ़ में गन्ने का रकबा निरंतर घट रहा है। गंभीरता का आंकलन इसी से लगाया जा सकता है कि 16 वर्षों में गन्ने का रकबा पहले की तुलना में मात्र 25 फीसदी रह गया है। वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकबा 22 हजार हेक्टेयर था, जो मौजूदा वर्ष 2021-22 में महज 4500 हेक्टेयर पर आ गया है।
साथा चीनी मिल ठप रहने के चलते पांच साल से जनपद में उत्पादित गन्ना साबितगढ़ समेत अन्य चीनी मिलों के लिए भेजा जा रहा है। तमाम आंदोलन हो चुके हैं। साथा चीनी मिल का मुद्दा कई बार विधानसभा में उठ चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मिल में नई यूनिट लगवाने का आश्वासन दे चुके हैं।
प्रमुख सचिव स्तर से मिल की नई यूनिट लगवाने के संबंध में पत्र भी जारी किया गया है, लेकिन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। साथा चीनी मिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्रपाल सिंह ने बताया कि चीनी मिल की नई यूनिट लगवाने एवं पेराई सत्र के लगातार विलंब होने पर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
मिल की मरम्मत में खर्च रुपया
वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपया
वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपया
वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपया
वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपया
वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपया
पिछले पांच वर्षों में घटा गन्ना उत्पादन का रकबा
वर्ष 2017-18 9000 हेक्टेयर
वर्ष 2018-19 7500 हेक्टेयर
वर्ष 2019-20 6000 हेक्टेयर
वर्ष 2020-21 5000 हेक्टेयर
वर्ष 2021-22 4500 हेक्टेयर
पिछले पांच वर्षों में गन्ने का उत्पादन
वर्ष 2017-18 72 लाख क्विंटल
वर्ष 2018-19 60 लाख क्विंटल
वर्ष 2019-20 48 लाख क्विंटल
वर्ष 2020-21 40 लाख क्विंटल
वर्ष 2021-22 36 लाख क्विंटल
जिले में स्थिति
साथा चीनी मिल की स्थापना : 1969
स्थापना के समय पेराई क्षमता : 12500 क्विंटल प्रतिदिन
साथा मिल को आवंटित : 950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना
शेष गन्ना : साबितगढ़ मिल बुलंदशहर, न्यौली मिल कासगंज एवं अन्य मिलों में स्थानांतरित
गन्ने का कुल रकबा : 4500 हेक्टेयर
कुल गन्ना किसान : नौ से दस हजार
कुल उत्पादन : 36 लाख क्विंटल
कुल गन्ना क्रय केंद्र : 15
- जिले के गन्ना किसानों का लंबित शत-प्रतिशत भुगतान कराया जा चुका है। चीनी मिल की नई यूनिट के लिए डीपीआर तैयार कराई जा रही है, जिसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। - रामशंकर, जीएम साथा चीनी मिल।