गांव छबीलपुर स्थित श्री हनुमान मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास संत बालयोगी महाराज ने कहा कि मन ही व्यक्ति को बंधन में बांध सकता है। मन ही बंधन से मुक्त कर सकता है। मन ताले की एक चाभी है। ताले को खोलना हो या बंद करना हो तो एक ही चाभी है।
कहा कि संसार के बंधन से मुक्त होना है, तो इस मन रूपी चाभी को भगवान की तरफ लगा दो। मन भगवान की तरफ लग जायेगा तो सांसारिक बंधन से मुक्ति मिल जाएगी। कहा कि कथा सुनने आए सभी लोगों का संबंध परमात्मा से है इसीलिए सारे काम छोड़कर कथा सुनने के साथ ही मन की वृत्ति परमात्मा में लगानी चाहिए।
कथा के श्रोताओं में प्रमुख रूप से हरिओम वार्ष्णेय, चेतनानंद महाराज, अवनेश शर्मा, सुबोध कुमार आचार्य, विकास शर्मा, दर्शनबाबू शर्मा, राकेश गुप्ता, विनोद गुप्ता, मिथलेश गुप्ता, ज्योति गुप्ता, अर्पणा गुप्ता शामिल रहे।