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कोरोना से डरे श्रमिक लौटने लगे घर, रेलवे हाई अलर्ट पर

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अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर लॉक डाउन लगने के डर से घर जाने के लिए प्लेटफार्म दो पर परिवार के साथ ट्रेन ? - फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण से कई राज्यों में लॉकडाउन और प्रदेश के कई शहरों में रात्रि कर्फ्यू लगने से जिले के प्रवासी श्रमिकों में दहशत का माहौल है। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों व उनके परिवारों को तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था। इसी के चलते ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिकों ने अपने घरों की तरफ रुख कर लिया है। इनको आशंका है कि पिछले साल की तरह इस बार भी लॉकडाउन लग सकता है। रेलवे स्टेशन पर बिहार जाने वाली ट्रेनों में मारामारी जैसी स्थिति है।
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इधर, इन प्रवासी श्रमिकों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए हाई अलर्ट जारी किया कर दिया है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में काम करने वाले अलीगढ़ के प्रवासी श्रमिक भी बड़ी संख्या में लौट रहे हैं। हालांकि, अभी जिला प्रशासन पिछले साल की तरह इनका आंकड़ा नहीं जुटा रहा है। यह साफ है कि अगर, प्रवासी श्रमिकों का अलीगढ़ में बड़ी संख्या में लौटना जिला प्रशासन के लिए सिरदर्द बन सकता है। इन प्रवासी श्रमिकों की कोरोना जांच और उनको रोजगार दिलाना चुनौती बन सकता है।
आरक्षित-तत्काल टिकटों की बिक्री में हुआ इजाफा
प्रवासी श्रमिकों के पलायन के चलते रेलवे की टिकट बिक्री में इजाफा हुआ है। अलीगढ़ जंक्शन के टिकट काउंटर से सामान्य दिनों में औसतन 450 आरक्षित टिकटों की प्रतिदिन बिक्री होती है। वहीं, तत्काल कोटे की 10 से 15 टिकटों की बिक्री होती है। मगर, पिछले पांच दिनों में इस संख्या में इजाफा हुआ है।
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सीएमआई संजय शुक्ला ने बताया कि आरक्षित टिकटों की बिक्री का ग्राफ इस समय करीब 550 है। लोग ऑनलाइन टिकट भी बुक करा रहे हैं। ऑनलाइन टिकटों की गिनती स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाती है। तत्काल कोटे की टिकट भी 20 से 25 के करीब बढ़ी हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डिवीजन की ओर से अलर्ट किया गया है। इसी सप्ताह से श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। यह श्रमिक बिहार की ओर अधिक जा रहे हैं।
- चमन सिंह तोमर, आरपीएफ पोस्ट कमांडर
ईंट-भट्ठों पर बिहार-झारखंड के अधिक मजदूर
जिले के इगलास, कौड़ियागंज, अकराबाद, जवां, टप्पल, खैर, अतरौली, हरदुआगंज में भारी संख्या में ईंट-भट्ठे संचालित होते हैं। इनमें हजारों की संख्या में बिहार व झारखंड आदि राज्यों के लोग मजदूरी करते हैं। अब इन मजदूरों की घर वापसी शुरू हो गई है। इसके पीछे दो कारण बताए जा रहे हैं, पहला यह कि गर्मी में ईंट भट्ठों पर काम कम हो जाएगा।
साथ ही बारिश का सीजन भी अगले दो माह में शुरू हो जाएगा। दूसरा, कोरोना का भय भी मजदूरों को सता रहा है। पिछले साल अलीगढ़ में लॉकडाउन के दौरान करीब आठ हजार भट्ठा मजदूर फंस गए थे। इन मजदूरों ने पैदल ही यात्रा शुरू कर दी थी। बाद में प्रशासन की ओर से बसों और ट्रेनों का इंतजाम किया गया था।
अलीगढ़ लौट रहे बड़ी संख्या में श्रमिक
प्रवासी श्रमिकों के जाने के साथ ही बड़ी संख्या में यहां के रहने वाले श्रमिक लौटने लगे हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में बड़ी संख्या में अलीगढ़ के लोग काम करते हैं। सबसे अधिक श्रमिक वहीं से आ रहे हैं। इनमें भी कोरोना का भय है। हालांकि, इनका फायदा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के उम्मीदवार उठाने में लगे हैं। वह इनको वापस लौटने के लिए कह रहे हैं, जिससे की उनकी वोट संख्या में इजाफा हो सके।
बिहार जाने वाली ट्रेनों में सर्वाधिक मारामारी
अलीगढ़ से बिहार जाने वाली मगध, महाबोधि, स्वतंत्रता सेनानी जैसी ट्रेनों में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक टिकट पाने के लिए मारामारी कर रहे हैं। हालांकि, बिना आरक्षित टिकट के यात्रा न करने के नियम के चलते उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे ने हाई अलर्ट जारी किया है। रेलवे अधिकारियों को निर्देश हैं कि किसी भी सूरत में स्टेशन पर सोशल डिस्टेंसिंग का नियम न टूटे, बिना आरक्षित टिकट के कोई यात्री यात्रा न कर पाए।
एक एलटी के हवाले पांच हजार लोगों की जांच का जिम्मा
कोरोना जांच शत प्रतिशत कराने का दम स्वास्थ्य विभाग भर रहा है। मगर इसकी पोल अलीगढ़ जंक्शन पर बाहर से आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच की व्यवस्था के लिए तैनात की गई टीम ही खोल रही है। यहां पर एक एलटी को तैनात किया गया है, जबकि स्टेशन पर हर रोज तकरीबन पांच हजार लोग विभिन्न ट्रेनों के जरिये आ रहे हैं।
एलटी अधिकतम 20 से 30 लोगों की जांच ही कर पा रहा है। इसमें भी उसको कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, क्योंकि उसके सहयोग के लिए कोई सुरक्षा जवान नहीं तैनात किया गया है। यात्री एलटी को गच्चा देकर निकल जाते हैं। यह लापरवाही ऐसे समय में की जा रही है, जब जिले में कोरोना की दूसरी लहर तेजी से फैल रही है।
ईंट भट्टों पर गर्मी-बारिश के सीजन में काम कम हो जाता है। लॉकडाउन का भी डर है। पिछले साल की तरह इस बार पैदल चलना नहीं चाहते, इसलिए समय रहते ट्रेन से घर पहुंच जाएंगे तो वहां कोई काम धंधा कर सकेंगे।
- लवकुश, श्रमिक निवासी गया, बिहार
कोरोना तेजी से फैल रहा है। आए दिन लॉकडाउन की खबरें आ रही हैं। इसलिए पिछली साल के माहौल से मिले सबक के चलते पहले ही घर जा रहे हैं। गांव में जाकर कोई काम-धंधा करके परिवार को पालेंगे।
- दिनेश मांझी, श्रमिक निवासी नालंदा, बिहार

अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर लॉक डाउन लगने के डर से घर जाने के लिए स्टेशन पर पहुंचे मजदूर ट्रेन का इंतजा- फोटो : CITY OFFICE

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