कुछ सूक्ष्मजीव की प्रजातियां ऐसी भी हैं, जो रैब्डिटिस, पैनाग्रोलाइमस, सेफालोबस और एप्हेलेनकस भारी धातुओं वाले वातावरण में भी जीवित रह सकती हैं। इनकी संख्या सीवेज सिंचित खेतों में अधिक पाई गई, जिससे यह साफ हुआ कि ये प्रदूषण के संकेतक (बायो-इंडिकेटर) के रूप में काम कर सकते हैं।
भारी धातुओं पर नियंत्रण के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन अपनाया जाए। प्राकृतिक खेती व मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए। मिट्टी में रहने वाले ये सूक्ष्म जीव अब चेतावनी दे रहे हैं अगर समय रहते जल प्रदूषण पर लगाम नहीं लगी तो इसका असर इससे फसल उत्पादन, गुणवत्ता और बाद में मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।-प्रोफेसर वसीम अहमद, जंतु विभाग, एएमयू
मिट्टी की स्थिरता पर खतरा
मिट्टी की सेहत मापने वाले सूचकांक (मैच्योरिटी इंडेक्स) सीवेज सिंचित खेतों में कम पाए गए। इसका अर्थ है कि मिट्टी की पारिस्थितिक स्थिरता कमजोर हो रही है। हालांकि कुछ मामलों में मिट्टी की जैव विविधता बढ़ी हुई दिखी, लेकिन यह अस्थिर और अवसरवादी जीवों की वजह से थी, जो लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है। अगर सीवेज सिंचाई लंबे समय तक जारी रही, तो भारी धातुएं धीरे-धीरे फसलों में जमा हो सकती हैं।