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AMU: सुपरबग पर काबू पाने वाली दवा जल्द आएगी बाजार में, एएमयू में 10 साल तक हुए शोध में हुई खोज

Thu, 10 Apr 2025 08:13 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

सुपरबग में शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स को भी नष्ट करने की क्षमता है। साल 2009 में अलीगढ़ में भी यह पाया गया था। यह एनडीएम-4 नई दिल्ली मेटालो लैक्टामेज एनडीएम-1 का अधिक घातक रूप था, जिसे पहली बार 2009 में भारतीय मूल के एक स्वीडिश मरीज से अलग किया गया था। 
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दवा (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुपरबग पर काबू पाने के लिए एक नई दवा जल्द बाजार में आने जा रही है। अलीगढ़ मुस्लिम विवि में दस साल तक चले शोध में इससे निपटने की दवा की खोज कर ली गई है। दवा तैयार करने का कार्य अंतिम चरण में है। शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल चुकी है।

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दरअसल, सुपरबग में शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स को भी नष्ट करने की क्षमता है। साल 2009 में अलीगढ़ में भी यह पाया गया था। यह एनडीएम-4 नई दिल्ली मेटालो लैक्टामेज एनडीएम-1 का अधिक घातक रूप था, जिसे पहली बार 2009 में भारतीय मूल के एक स्वीडिश मरीज से अलग किया गया था। 

एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूसी) के निदेशक एवं इंटरडिसिप्लिनरी बायोटेक्नोलॉजी लैब के समन्वयक प्रो. असद यू. खान और डॉ शादाब परवेज ने 2014 इस पर शोध शुरू किया। डॉ असद उल्लाह खान ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के सामान्य वार्ड के शौचालयों से 10 मीटर के भीतर तीन जगहों से सीवेज के पानी के 52 नमूने उठाए और उनकी जांच की गई। इनमें एनडीएम-4 का केवल एक पुष्ट मामला मिला था। जिसे अलग किया गया, लेकिन यह देखते हुए कि यह बग बहुत तेजी से बढ़ता है। इस पर शोध शुरू किया गया। इससे पहले यह बग कैमरून, डेनमार्क, फ्रांस और चेक गणराज्य में ही पाया गया था।  
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डॉ. खान ने बताया कि अभी किसी भी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है, लेकिन देश में खराब स्वच्छता मानकों के कारण यहां ई-कोली में इस बैक्टीरिया का पता लगने का मतलब है कि हमें सुरक्षित पेयजल और दूषित भोजन से बचना चाहिए, सावधानी बरतनी चाहिए।

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