शासन द्वारा हाल ही में जारी मक्का खरीद नीति में किसानों से मक्का खरीद की घोषणा किसानों के लिए छलावा साबित हुई है। मक्का का समय गुजरने के बाद जारी नीति और उसके लक्ष्य ने मक्का खरीद से जुड़े अफसरों को हलकान कर रखा है। येन केन प्रकारेण लक्ष्य को पाने के लिए वे किसानों की गणेश परिक्रमा में जुटे हैं। मंडियों के दौरे हो रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही है।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले की चारों प्रमुख मंडियों में क्रय केंद्र खोलने के बावजूद पिछले 15 दिनों में मक्के का एक दाना तक नहीं खरीदा जा सका है। बताते चलें कि जिले में 19600 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का का उत्पादन होता है।
नवंबर माह की शुरुआत में जारी हुई थी मक्का खरीद नीति
प्रदेश सरकार ने नवंबर माह की शुरुआत में मक्का खरीद नीति को मंजूरी दी थी। प्रदेश के 20 जिलों में लागू इस नीति के तहत क्रय केंद्र स्थापित कर कुल मिलाकर एक लाख मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य रखा गया। किसानों से 1700 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मक्का खरीद होनी थी।
जिले को 4 हजार मीट्रिक टन खरीद का मिला लक्ष्य
जिले को चार हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य मिला। इसे पाने के लिए 15 नवंबर को जिले की चारों मंडियों धनीपुर, खैर, अतरौली व छर्रा में चार क्रय केंद्र खुलवाए गए।
मंडियों की खाक छान रहे अफसर, परंतु नतीजा सिफर
डिप्टी आरएमओ अजय विक्रम सिंह ने स्वीकार किया कि अब तक मक्का का एक भी दाना नहीं खरीदा जा सका है। शुक्रवार को भी उन्होंने छर्रा, अतरौली एवं धनीपुर मंडी का दौरा किया। दरअसल किसी भी मंडी में मक्का है ही नहीं।
जुलाई से शुरू होती है आवक
मक्का की बुवाई अप्रैल मई में होती है और जुलाई से इसकी फसल आनी शुरू हो जाती है। जिले में मक्का बुवाई का क्षेत्रफल 19600 हेक्टेयर है। इसी दौरान मंडियों में मक्का की बहार रहती है।
माह वार चारों मंडियों में मक्का खरीद के आंकड़े
-जून-70 हजार क्विंटल
-जुलाई-80 हजार क्विंटल
-अगस्त-45 हजार क्विंटल
-सितंबर-40 हजार क्विंटल
-अक्तूबर-6 हजार क्विंटल
-नवंबर-120 मीट्रिक टन