कड़ाके की ठंड और कोहरे में मुर्गा, मछली और मीट की खपत लगभग 20 फीसदी तक बढ़ गई है। एक पखवाड़े में हुए इस इजाफे से घरेलू कारोबार बढ़ा है। वहीं, भैंस मीट का निर्यात भी लगभग 60 करोड़ रुपये तक बढ़ गया है। जिससे मीट निर्यातकों में उत्साह है।
बाजार में इन दिनों दिल्ली से आने वाली और जनपद में पाली जा रहीं मछलियों की मांग 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है।रेस्टोरेंट, ढाबों और होटलों में फिश फ्राई, फिश पकौड़े की मांग सबसे ज्यादा है। स्नैक्स से लेकर लंच और डिनर तक इसको परोसा जा रहा है। फिश करी भी मांग है। बकरे और भैंस के मीट की मांग में इजाफा हुआ है। सर्दी से पहले सामान्य दिनों में 3500 बकरों और 450 भैंसों की रोजाना घरेलू बाजार में खपत हो रही थी, जो अब बढ़ कर 4000 बकरों और 500 भैसों तक पहुंच गई है।
जनपद में पांच लाख मुर्गा-मुर्गी हर महीने पैदा हो रहे हैं। दस लाख के करीब मुर्गा मुर्गी दूसरे शहरों से आते हैं। इस तरह रोजाना 50 हजार मुर्गा मुर्गी की खपत हो रही है, जो सर्दी से पहले लगभग 40 हजार के आसपास थी। बटर चिकन, फ्राई चिकन, रोस्टेड चिकन, चिकन करी, कढ़ाई चिकन, चिकन सूप, बिरयानी की सर्वाधिक मांग है।
कड़ाके की ठंड में मछली, मुर्गा, बकरे और भैंस के मीट के साथ अंडों की खपत लगभग 20 फीसदी तक बढ़ गई है। रोजाना मीट एक्सपोर्ट के लिए लगभग 3500 भैंसों का कटान हो रहा है। एक करोड़ 78 लाख 70 हजार अंडे का उत्पादन हर महीने हो रहा है। पांच लाख मुर्गा-मुर्गी हर महीने पैदा हो रहे और खाए जा रहे हैं।
-डाॅ. एनएन शुक्ला, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
इस वक्त जिन देशों में ठंड का मौसम है, वहां भैंस के मीट की मांग बढ़ गई है। यहां से निर्यात जारी है। जिस देश से जैसी मांग हो रही है, उसी के अनुसार एक्सपोर्ट हो रहा है। हर महीने औसतन 660 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा है।
-परवेज, मीट एक्सपोर्ट कंपनी के प्रतिनिधि।
अंडों की खपत बढ़ गई है। सर्दी के इन दिनों में लगभग 6.50 लाख अंडों की रोजाना खपत हो रही है, जो सर्दी से पहले लगभग 4.50 लाख रोजाना तक थी।
-विवेक कुमार, पोल्ट्री फार्म कारोबारी।
20 दिसंबर को थोक बाजार में प्रति अंडा 6.35 रुपये का रेट था, जो 4 जनवरी को 5.20 रुपये प्रति अंडा हो गया है। इस वक्त अंडा बाहर से भी आ रहा है। इसलिए भी रेट कुछ कम हुआ है।
-विशाल राठी, फ्रेंडस पोल्ट्री फार्म।