24 जनवरी की सुबह से ही सैकड़ों गांवों के हजारों की संख्या में लोग बलिदानी के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े थे। इनमें युवाओं की संख्या अधिक थी। ताबूत में राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा उनका पार्थिव शरीर सुबह करीब नौ बजे बुलंदशहर जनपद के पहासू पहुंचा तो वहां पर हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। भारी भीड़ के चलते पहासू से जवां के गांव दाऊपुर तक करीब सात किलोमीटर दूर पार्थिव शरीर पहुंचने में साढ़े तीन घंटे का समय लग गया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे बलिदानी के शव को गांव लाया जा सका। हजारों की संख्या में लोग बलिदानी के पीछे-पीछे चल रहे थे। रास्ते में सेना का वाहन रोक-रोककर लोग पुष्प वर्षा करते रहे।
इन गांवों के लोग मौजूद रहे
गांव कसूमी, सोयी, फतेहाबाद, बामनी नगला, त्यौरी, पला, पला नगला, खेड़ा, हीसोटी नागर, पहाड़पुर, जरारा, गांवरी, परतापुर, श्यामपुर, रामनगर, बरौली, बरौला आदि।
गांव दाऊपुर निवासी प्रताप सिंह के तीन बेटों में दो मोनू और प्रशांत की वर्ष 2019 में सेना के चार राष्ट्रीय राइफल्स में नौकरी लगी थी। दोनों भाई जम्मू कश्मीर में तैनात थे। कश्मीर के डोडा जिले के 9000 फीट ऊंचे खन्नीटाप में मौसम खराब होने की वजह से सेना का वाहन 200 फीट गहरी खाई में गिर गया था। इसमें 10 जवान बलिदान हुए, जबकि 11 जवान घायल हुए। इनमें से 10 को एयरलिफ्ट कर ऊधमपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो माह पहले ही गांव में अवकाश का समय बिताकर मोनू चौधरी ड्यूटी पर लौटे थे।
दाऊपुर की माटी गाती, शौर्य की गाथा : जयवीर
बलिदानी मोनू चौधरी को श्रद्धांसुमन अर्पित करने के बाद बरौली विधायक ठा. जयवीर सिंह ने कहा कि दाऊपुर की माटी शौर्य की गाथा गाती है। युगों-युगों तक मोनू चौधरी के पराक्रम की गाथा गूंजेगी। उन्होंने मृतक की आत्मा को अपने चरणों में स्थान देने और शोक संतृप्त परिवार को संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।