एक जुलाई से भले ही देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर दिया है, लेकिन इस नई व्यवस्था को ठीक से कार्यान्वित करने के लिए दुकानदार अभी पूरी तरह अपडेट नहीं हुए हैं। संबंधित विभागों एवं सरकारी मिशनरीज की लापरवाही के कारण लगातार दूसरे दिन बाजार में कारोबार नरम रहा।
रेलवे रोड, सराफा बाजार, बड़ा बाजार, मामू भांजा, बारहद्वारी, मीरी लाल की प्याऊ, पत्थर बाजार, सेंटर प्वाइंट, रामघाट रोड, अमीर निशा आदि बाजारों की रौनक गायब है। महीने का शुरुआती दिन होने के बावजूद महावीरगंज एवं कनवरीगंज जैसे किराना एवं खाद्य पदार्थों के बाजार से रविवार को ग्राहक गायब थे। अधिकतर दुकानदारों के पास जीएसटी नंबर नहीं है।
यहां के थोक व्यापारियों से बड़ी कंपनियों के कर्मचारी टिन नंबर के साथ आधार कार्ड एवं एकाउंट नंबर आदि भी मांग रहे हैं, ताकि जीएसटी नंबर आने तक माल की आपूर्ति सुचारु रूप से चलती रहे। दुकानदारों का कहना है कि महीने के शुरुआती दिनों में अच्छी बिक्री होती है, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद बिक्री में कमी आई है। बिल काटने से व्यापारी कतरा रहे हैं।
महीने का शुरुआती दिन है। बाजार में ग्राहक नहीं हैं या हैं भी बेहद कम। जीएसटी को लेकर सभी असमंजस में हैं। पिछले दो दिन में कारोबार काफी नरम है।
- अमित कुमार, किराना व्यवसायी
एक महीना पहले जीएसटी नंबर के लिए आवेदन किया था। अभी तक न तो नंबर और न ही बिल का प्रोफार्मा मिला। चंद रोज बाद सावन शुरू होने जा रहा है। व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा। बिना तैयारी जीएसटी लागू कर दिया गया है।
- उपेंद्र सिंघल, कपड़ा व्यवसायी
दाल-चावल आदि खाद्य पदार्थों पर जीएसटी नहीं है। सिर्फ ब्रांडेड सामानों पर जीएसटी है। बाजार जल्द ही सामान्य स्थिति में आ जाएगा। जिला प्रशासन एवं वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी कार्यक्रम आयोजित कर जीएसटी के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
- राज कुमार गुप्ता, व्यवसायी
बाजार में घूम रहे केंद्र के अधिकारी!
अलीगढ़। महावीरगंज में इस बात की खूब चर्चा रही कि आरबीआई या केंद्र के अधिकारी गुपचुप तरीके से बाजार में घूम रहे हैं। बाजार सूत्रों की मानें तो रविवार को दो लोग बाइक से बाजार में कई दुकानों पर गए। वे लोग आम आदमी की तरह दुकानदारों से बात कर रहे थे। उनका कहना था कि घर में दावत है। उसके लिए सामान चाहिए, लेकिन वह पेमेंट चेक से करेंगे और एक नंबर का बिल चाहिए। अधिकतर दुकानदारों ने असमर्थता जता दी। एक दुकानदार की बातों पर भरोसा करें तो जेब से सामान निकालते समय एक आदमी का आई कार्ड झलक गया, जिस पर आरबीआई लिखा था।
पैकेट से गायब होने लगे ब्रांड
टैक्स बचाने के लिए खाद्य पदार्थोें के पैकेट से ब्रांड गायब होने हैं। रविवार को महावीरगंज में कुछ ऐसे पैकेट उतरे, जिससे ब्रांड गायब था। सादे बोरे में बेसन आदि आए थे, जबकि पहले उस पर आकर्षक तरीके से ब्रांड छपे होते थे। जानकारों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा के मौजूदा दौर में बाजार में टिके रहने के लिए खाद्य पदार्थों के निर्माण से जुड़े व्यवसायी ब्रांड हटा देेंगे। ऐसे लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों पर जीएसटी नहीं है, लेकिन ब्रांडेड पर 5 प्रतिशत जीएसटी है।