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मनरेगा : कोरोना काल में रोजगार में आई गिरावट

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आशीष श्रीवास्तव
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महामारी के दूसरे चरण में कोराना कर्फ्यू रोजगार पर बहुत भारी पड़ा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इस बीमारी के प्रसार ने खासा असर डाला। ग्रामीणों को वर्ष में 100 दिन घर के पास ही रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा में मानव दिवसों की संख्या कम हो गई। रही सही कसर त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों ने पूरी कर दी।
इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा में मानव दिवसों की खराब स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020-21 में जहां 730947 के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष जून तक 884955 मानव दिवस सृजित कर लिए थे। पूरे वित्तीय वर्ष में 1718995 मानव दिवसों का सृजन किया था, जो कुल लक्ष्य का 235.174 प्रतिशत था। इस वित्तीय वर्ष 2021-22 में 802215 के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष एक अप्रैल 2021 से 20 जून 2021 तक 201239 मानव दिवस सृजित हो चुके हैं। अकेले जून में 60215 मानव दिवसों का सृजन हुआ है।
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कोरोना व चुनाव ने डाला असर
अलीगढ़। मनरेगा के तहत मिलने वाले रोजगार पर कोरोना महामारी व त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का सबसे ज्यादा असर रहा। वित्तीय वर्ष शुरू होते ही चुनाव आचार संहिता लग गई। 2 मई को चुनाव सम्पन्न हुए तो ग्राम पंचायत सदस्यों के उप चुनाव आ गए। रविवार को जिले की 388 ग्राम पंचायतों की पहली बैठक हुई। वहीं, कोरोना महामारी के चलते श्रमिक भी घरों से नहीं निकले। इन सभी का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा।
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15 दिन में कार्यों ने पकड़ी रफ्तार
डीसी मनरेगा सचिन कुमार ने बताया कि पंचायत चुनाव व कोरोना के चलते अप्रैल व मई माह में नए काम शुरू ही नहीं हुए। पहले से चल रहे कुछ काम हुए, लेकिन उनमें श्रमिक कम ही रहे। पिछले पखवाड़े से काम मे तेजी आई है। वर्तमान में करीब 20 हजार से 22 हजार मनरेगा श्रमिक रोजाना काम कर रहे हैं।
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