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स्मृति शेष: मनमोहन सिंह ने अलीगढ़ जंक्शन पर जाना था ट्रेनें कैसे-क्यों हो जाती हैं लेट, रुके थे पौन घंटे

Sat, 28 Dec 2024 11:05 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मनमोहन सिंह लगभग पौने घंटे तक स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में रुके। एसएस एआर खान से कालका मेल सहित अन्य ट्रेनों के लेट होने के कारणों को जाना। उन्हें बताया कि सुरक्षा और संरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन होने के कारण अक्सर ट्रेनें लेट होती है।
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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूरी दुनिया में एक अर्थशास्त्री और सफल प्रधानमंत्री के रूप में पहचान रखने वाले मनमोहन सिंह ने ट्रेनों की लेटलतीफी और यात्री सुरक्षा के कुछ नियम-कायदे अलीगढ़ जंक्शन पर जाने थे। वे इस रेलवे स्टेशन पर तकरीबन पौन घंटे तक ठहरे। इस दौरान उन्होंने ट्रेनों के लेट होने के कारण जाने थे। उन्हें कालका मेल से दिल्ली जाना था वह भी एक घंटा लेट थी।

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पूर्व स्टेशन अधीक्षक अलीगढ़ जंक्शन एआर खान ने बताया कि उस वक्त मनमोहन सिंह राज्यसभा में नेता विरोधी दल थे। 27 मार्च 2003 को एएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए अलीगढ़ आए थे। एएमयू के तत्कालीन उपकुलपति नसीम अहमद ने एआर खान को उनसे मिलवाया था, क्योंकि उन्हें कालका मेल से अलीगढ़ से दिल्ली जाना था। शाम पौने पांच बजे जब ट्रेन आने का वक्त हुआ तो उन्हें विदा करने के लिए उपकुलपति व यूनिवर्सिटी के अन्य अधिकारी उनके साथ स्टेशन जाने लगे।
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इस पर उन्होंने अधिकारियों से विवि का प्रोग्राम छोड़ कर स्टेशन तक साथ आने के लिए मना कर दिया। बोले-मेरे साथ स्टेशन अधीक्षक एआर खान हैं, वह मुझे विदा करेंगे। इतना सुनकर एसएस खान, विवि की कार से मनमोहन सिंह के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां पहुंचने पर पता चला कि शाम 5.05 बजे आने वाली कालका मेल लगभग पौन घंटे के विलंब से छह बजे तक आएगी।

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एआर खान बताते हैं कि इसी दौरान उन्हें मनमोहन सिंह से कुछ बातें करने का मौका मिला। वह लगभग पौने घंटे तक स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में रुके। उन्होंने कालका मेल सहित अन्य ट्रेनों के लेट होने के कारणों को जाना। उन्हें बताया कि सुरक्षा और संरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन होने के कारण अक्सर ट्रेनें लेट होती है। हाथरस में रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने के लिए ब्लॉक लिया गया है, इसीलिए कालका एक्सप्रेस देरी से चल रही है।

एआर खान ने उन्हें यात्री सुरक्षा एवं संरक्षा नियमों की जानकारियां दीं। डॉक्यूमेंट व रजिस्टर दिखाए। ट्रेन चालक के मेडिकल टेस्ट और रिफ्रेशर कोर्स की जानकारी दी। यह सब देख कर मनमोहन सिंह रेलवे की कार्य प्रणाली व नियमों से बेहद प्रभावित हुए। एआर खान ने बताया कि लगभग छह बजे ट्रेन प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई। सीढि़यां चढ़ कर सभी प्लेटफार्म नंबर तीन पर पहुंचे। जब ट्रेन चलने लगी तो एसी फर्स्ट कोच के दरवाजे पर खड़े होकर उन्होंने सबको धन्यवाद किया। कहा कि वह रेलवे के नियमों से बेहद प्रभावित हैं, इस जानकारी को भूल नहीं पाएंगे। अलीगढ़ से जाने के कुछ महीनों बाद 22 मई 2004 को वह प्रधानमंत्री बने।

एआर खान बताते हैं कि नेता प्रतिपक्ष रहते हुए मनमोहन सिंह द्वारा एक साधारण व्यक्ति की तरह शालीनता के साथ बातचीत करने से वह बेहद प्रभावित हुए। कुछ देर की मुलाकात से बहुत कुछ सीखा, जो पूरे जीवन याद रहा। उनको सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सब सादगी भरे जीवन के साथ निष्ठा से अपना कर्तव्य पालन करें, जैसे जीवन भर खुद उन्होंने किया...।
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