एआर खान बताते हैं कि इसी दौरान उन्हें मनमोहन सिंह से कुछ बातें करने का मौका मिला। वह लगभग पौने घंटे तक स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में रुके। उन्होंने कालका मेल सहित अन्य ट्रेनों के लेट होने के कारणों को जाना। उन्हें बताया कि सुरक्षा और संरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन होने के कारण अक्सर ट्रेनें लेट होती है। हाथरस में रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने के लिए ब्लॉक लिया गया है, इसीलिए कालका एक्सप्रेस देरी से चल रही है।
एआर खान ने उन्हें यात्री सुरक्षा एवं संरक्षा नियमों की जानकारियां दीं। डॉक्यूमेंट व रजिस्टर दिखाए। ट्रेन चालक के मेडिकल टेस्ट और रिफ्रेशर कोर्स की जानकारी दी। यह सब देख कर मनमोहन सिंह रेलवे की कार्य प्रणाली व नियमों से बेहद प्रभावित हुए। एआर खान ने बताया कि लगभग छह बजे ट्रेन प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई। सीढि़यां चढ़ कर सभी प्लेटफार्म नंबर तीन पर पहुंचे। जब ट्रेन चलने लगी तो एसी फर्स्ट कोच के दरवाजे पर खड़े होकर उन्होंने सबको धन्यवाद किया। कहा कि वह रेलवे के नियमों से बेहद प्रभावित हैं, इस जानकारी को भूल नहीं पाएंगे। अलीगढ़ से जाने के कुछ महीनों बाद 22 मई 2004 को वह प्रधानमंत्री बने।
एआर खान बताते हैं कि नेता प्रतिपक्ष रहते हुए मनमोहन सिंह द्वारा एक साधारण व्यक्ति की तरह शालीनता के साथ बातचीत करने से वह बेहद प्रभावित हुए। कुछ देर की मुलाकात से बहुत कुछ सीखा, जो पूरे जीवन याद रहा। उनको सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सब सादगी भरे जीवन के साथ निष्ठा से अपना कर्तव्य पालन करें, जैसे जीवन भर खुद उन्होंने किया...।