यह सजा सुनाई
न्यायालय ने दोषी को अपहरण में सात वर्ष, हत्या में उम्रकैद, सबूत मिटाना में सात वर्ष व बालकों संग लैंगिक हमले में शेष प्राकृत जीवन तक के लिए सजा सुनाई है।
खुद खाई व बालक को खिलाई थी भांग
पुलिस के समक्ष मनोज ने यह बयान दिया था कि वह जब बालक को अपने साथ लेकर गया तो उसने उसे बातों में लगाकर भांग खिला दी थी। खुद भी भांग खाई थी। चूंकि वह बालक के बड़े भाई का अच्छा दोस्त था। इसलिए बच्चे ने भांग खा ली। नशे में उसने बालक के साथ दुष्कर्म किया।
ये साक्ष्य बने सजा का आधार
इस मामले में पुलिस विवेचना में सामने आया कि बालक जब दरवाजे पर खेल रहा था। तब एक अन्य बालक ने देखा कि मनोज उसे पेड़ की ओट से साथ चलने के लिए इशारा कर रहा है। बाद में मनोज उसे बाइक पर बैठाकर ले जाता है। इसके कुछ देर बाद वह गांव से फावड़ा ले जाते देखा गया, मगर बालक गायब था। यह गवाही बालक द्वारा दी गई। बालक गायब होने पर वह खुद उसकी तलाश कराता है। पुलिस को गलत जानकारियां देता है। इधर, खुलासे के बाद पुलिस ने मौके से बालक की चप्पल, मनोज का अंगोछा, पेट्रोल की खाली बोतल, माचिस, नमक का पाउच आदि बरामद किए। अंगोछा व कपड़ों पर मनोज के खिलाफ वैज्ञानिक साक्ष्य मिले। वहीं, कुल दस गवाह पेश किए गए। इसके अलावा बालक के डीएनए नमूनों का बालक के माता-पिता से मिलान हुआ है।
अभियोजन ने मांगा था मृत्युदंड
इस मामले में पैरवी कर रहे अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी महेश सिंह, रघुवंश शर्मा ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी करार दिए गए मनोज के लिए मृत्युदंड की मांग की। मगर न्यायालय ने मामले में ताउम्रकैद से दंडित किया।
बचाव पक्ष करेगा हाईकोर्ट में अपील
इस मामले में बचाव पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ज्ञानेंद्र चौधरी ने न्यायालय में पक्ष न सुने जाने की बात कहते हुए कहा है कि तथ्यों को दरकिनार किया गया है। अब वे इस मामले में हाईकोर्ट में अपील करेंगे।