अलीगढ़ महानगर के सिविल लाइंस इलाके से किशोरी को अगवाकर ले जाने व जबरन शादी और दुष्कर्म के आरोपी रिश्तेदार युवक संजय कुमार को दोषी करार देकर 20 वर्ष की सजा सुनाई गई है। यह निर्णय एडीजे पॉक्सो विशेष अभिषेक कुमार बगड़िया की अदालत ने सुनाया है। साथ में 20 हजार रुपया अर्थदंड नियत करते हुए पूरी राशि पीड़ित को देने के निर्देश दिए हैं।
13 नवंबर 2024 को सिविल लाइंस थाने में 16 वर्ष की किशोरी के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि 12 नवंबर की रात एक बजे से उनकी बेटी गायब है। इस मामले में हरियाणा के अंबाला कोतवाली सदर दुर्गानगर के संजय कुमार को नामजद किया गया। कहा कि आरोपी उनका रिश्तेदार है।
पुलिस ने किशोरी को खोजने के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया। किशोरी के बयानों में यह बात स्पष्ट हुई कि आरोपी उसे जबरन लेकर गया था और उसे गुरुग्राम में एक कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया। कुछ दिन झोपड़ी में रखा और मंदिर में जबरन शादी की। बाद में उसे पत्नी की तरह रखने लगा। बयान के आधार पर न्यायालय में चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर संजय को दोषी करार देकर सजा सुनाई है।
गैर इरादतन हत्या में तीन भाइयों को सजा
खैर क्षेत्र के 15 वर्ष पुराने गैर इरादतन हत्या के अपराध में तीन सगे भाइयों सुखपाल, लक्ष्मण और मनोज को सात-सात वर्ष की सजा से दंडित किया है। यह निर्णय एडीजे विशेष एंटी करप्शन कोर्ट-प्रथम विनय तिवारी की अदालत ने सुनाया है। साथ में पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी नियत किया है।
घटना 25 मई 2011 की है। खैर के नारायनपुर गांव के बबलू ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि गांव में उनकी संतोषी पक्ष से रंजिश चल रही थी। घटना वाली शाम को चाचा महेंद्र सिंह जब गल्ला पिसवाने जा रहे थे, तभी गांव के ही मंदिर के सामने संतोषी व उसके तीन बेटों सुखपाल, लक्ष्मण और मनोज ने लाठी डंडों से चाचा पर हमला कर दिया। उनके गंभीर चोट आई और वह बेहोश हाे गए। उपचार के दौरान कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई। सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर अब न्यायालय ने संतोषी के तीनों नामजद बेटों को सजा सुनाई है, जबकि संतोषी की सत्र परीक्षण के दौरान मृत्यु हो गई थी।