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कुपोषित डॉली को निगल गया भ्रष्टाचार

Mon, 22 Jan 2018 01:55 AM IST
अभिषेक शर्मा, न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
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कुपोषण की शिकार डॉली का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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हर बच्चे को सेहतमंद रखने की योजना को लेकर सीना तान रही सरकार के लिए शर्मनाक खबर है कि अति कुपोषित घोषित डॉली अब इस दुनिया में नहीं रही। अकराबाद के गांव सिंहपुर की डॉली पुत्री सूरजपाल जो 20 नवंबर को विभाग की ही जांच में कुपोषण के लाल घेरे से भी 31 फीसदी अधिक कुपोषित मिली थी।
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रेफरल कार्ड देकर विभाग की टीम इलाज का वादा भी कर आई थी। फिर उसने 56 दिनों तक टीम की राह देखी और फिर चल बसी। नौ माह की डॉली ने इस सिस्टम को खूब झेला। विजयगढ़ सीएचसी पर उसे इस दुनिया में भी तब आने दिया जब दो हजार रुपये रिश्वत ले ली गई। डॉली तो चली गई पर सबके लिए संदेश जरूर छोड़ गई। 

मां ने बताया, दौड़ाया गया और रुपये एेंठे
डॉली की मां ने बताया कि आरबीएसके टीम में शामिल महिला बोली थी कि एक हजार रुपये डालकर ले चलना। लेकिन फिर उन्होंने कोई खबर नहीं दी। 20-25 दिन बाद टीम में शामिल महिला बोली जहां (आंगनबाड़ी केंद्र) वजन तौला था, वहीं चली जाओ। वहां गई तो वह बोलीं कि अकेली अलीगढ़ नहीं जा सकती। इससे पहले डॉली के जन्म के समय एक महिला ने विजयगढ़ सीएचसी को अच्छा बताया था। वहां 1400 रुपये खाते में आए लेकिन नर्स कल्पना और नार काटने वाली ने मिलकर दो हजार रुपये लिए तब डिलीवरी की। मना किया तो नर्स ने तमाम बातें बना डालीं कि लड़का है, इस डिलीवरी में खतरा ज्यादा है वगैरह। फिर कर्ज लेकर दो हजार रुपये उन्हें देने पड़े।
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कुपोषण से ज्यादा घातक रही लापरवाही
दो हजार रुपये की रिश्वत देने के बाद डॉली का जन्म हुआ। 20 नवंबर 2017 को आरबीएसके टीम की जांच में डॉली का वजन 5 किग्रा, लंबाई 64 सेमी और एमयूएसी 8 सेमी था। लाल घेरा 11.5 सेमी एमयूएसी से शुरू होता है लेकिन डॉली उससे भी 31 फीसदी ज्यादा कुपोषित थी। डिलीवरी प्वाइंट पर बच्चे की जांच करना आरबीएसके टीम की जिम्मेदारी थी। टीम ने जांच में सात माह लगा दिए। हर हाल में उपचार दिलाने के बजाए फिर लापरवाह हो गए। संबंधित आंगनबाड़ी, आशा बहू और एएनएम ने भी वही किया।

ये है पिता की जुबानी
गांव में आरबीएसके टीम आई थी। वे लोग कह रहे थे कि अभी बेड खाली नहीं है। खाली होते ही कॉल कर देंगे। यह बच्ची के खत्म होने से 20-25 दिन पहले की बात है। डॉली सोमवार 15 जनवरी 2018 सुबह 6 बजे खत्म हुई थी।

छह बेड खाली थे उस दिन
डॉली की स्क्रीनिंग 20 नवंबर को हुई थी, उस दिन पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में छह बेड खाली थे। पूरे नवंबर कुछ बेड खाली थे। दिसंबर में भी 20, 21, 22, 28 और 29 को छोड़कर सभी दिन बेड खाली रहे हैं। इस समय भी रविवार को भी आठ बेड खाली थे। 

मंत्री की चेतावनी रखी ताक पर
गत दो जनवरी को ही सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि इतने इंतजामों के बाद भी यदि भूख या कुपोषण से एक भी मृत्यु हुई तो प्रधान से डीएम तक सब पर कार्रवाई होगी। इस बाबत निर्देश भी सभी जिलाधिकारियों को जारी किए गए थे। 

-वैसे सीधे तौर पर यह प्रकरण संज्ञान में नहीं है। मगर यह बेहद चिंता का और गंभीर विषय है कि जब टीम द्वारा किसी बच्ची को कुपोषित चिह्नित किया है। इसके बाद भी उसे न तो इलाज मिला और न अन्य सुविधाएं मिलीं। इस विषय में जानकारी कराएंगे और जांच होगी। दोषी पर कार्रवाई भी होगी।   -दिनेश चंद्र सीडीओ

-मैं मौजूद थी उस दिन। टीम कह रही थी कि बेड खाली नहीं है, खाली होते ही कॉल कर देंगे। टीम ने कहा था गाड़ी भेजेंगे लेने के लिए। रेफरल कार्ड भी टीम अपने साथ ले गई थी।
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-रामरती शर्मा, आंगनबाड़ी, सिंहपुर 
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