श्रमिक की मौत के बाद फैक्ट्री में काम बंद कर दिया गया
औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक इकाई के लिए प्लाट लेकर वर्षों तक फैक्ट्री का निर्माण न कराने का गोरखधंधा अब नहीं चल सकेगा। प्लाट होल्डर्स को या तो निर्माण कराकर औद्योगिक उत्पादन शुरू करना होगा, अन्यथा प्लाट का समर्पण करना होगा। वह भी 31 अगस्त तक। शासन ने औद्योगिक क्षेत्र की भूमियों को उपयोगी बनाने तथा औद्योगिक इकाई लगाने के इच्छुक नए लोगों को मौका देने के लिए नियमों में बदलाव किया है। हालांकि पुराने प्लाट होल्डर्स को शपथ पत्र के साथ एक साल तक समय वृद्धि का विकल्प भी दिया गया है, लेकिन इसके लिए उन्हें वृद्धि शुल्क निर्धारित समय सीमा में हर सूरत में जमा कराना होगा।
उद्यमियों को दिए हैं तीन विकल्प
यूपीएसआईडीसी के एमडी टीके राय ने बताया कि उद्यमियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। इनमें पहला विकल्प है जल्द से जल्द अपने भूखंड में उत्पादन शुरू कर दें। दूसरा विकल्प है कि 31 अगस्त तक समय वृद्धि का विकल्प चुनकर शपथ पत्र के साथ समय वृद्धि शुल्क जमाकर एक साल का समय लें और तुरंत इकाई निर्माण शुरू कर एक साल के अंदर उत्पादन शुरू कर दें। तीसरा विकल्प प्लाट को सरेंडर करने का है।
समर्पण नीति का भी ले सकते हैं लाभ
एमडी ने बताया कि समर्पण नीति भी अपनाई जा सकती है। इसमें प्लाट के सारे ड्यूज का समायोजन कर अपने मामले अपडेट करा लें। उसके बाद प्लाट के समर्पण की पेशकश विभाग से करें। विभाग ब्याज की 40 फीसदी राशि काटकर 60 फीसदी राशि संबंधित उद्यमी को वापस कर दी जाएगी।
-----------
अब तक प्लाट खरीदकर मार रहे थे मौज
अलीगढ़। करीब 30 वर्ष पूर्व बने अलीगढ़ के तालानगरी औद्योगिक क्षेत्र में कई लोगों ने प्लाट खरीद कर डाल दिए थे। इन पर न तो कोई औद्योगिक इकाई खड़ी की और न ही कोई निर्माण कराया। कई प्लाट तो 15 से लेकर 30 साल से रिक्त पड़े हैं तो कई में नाममात्र का निर्माण कराकर खाली छोड़ दिए गए हैं।
औद्योगिक प्लाट व उनके आंकड़े
तालानगरी औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 1 में आवंटित 870 में से मात्र 475 प्लाटों पर उत्पादन हो रहा है। शेष या तो अधबने हैं या प्लाट खाली पड़ा है। जबकि सेक्टर 2 में आवंटित 403 में से 241 पर उत्पादन हो रहा है। शेष खाली पड़े हैं। इधर सीडीएफ छेरत की तरफ के 116 भूखंडों में से मात्र 12 पर उत्पादन हो रहा है। शेष खाली पड़े हैं।