व्हीकल मित्र नाम का ये सिस्टम वाहन के आगे के बंपर के अंदर या बाहर लगाया जाता है। जिसमें बंपर की पूरी फ्रंट साइड के साथ लोहे की हैवी ग्रिल लगती है। इस ग्रिल के साथ दो हैवी ड्यूटी शॉक अब्जार्वर अंदर की ओर जुड़े होते हैं, जिनको ब्रेक से जोड़ा जाता है। किसी भी चीज या वाहन से टकराते ही सिस्टम नैनो सेकंड से भी कम समय में काम करता है। टक्कर के लगते ही ग्रिल से जुड़े शॉक अब्जार्वर उसकी टक्कर की ऊर्जा को जब्त कर कम कर देते है और बाकी ऊर्जा को पीछे ब्रेक पर डाल कर ब्रेक लगा देते हैं। तुरंत ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाता है, जिससे वाहन जहां का तहां खड़ा हो जाता है। अगर ड्राइवर सो भी जाए तो वाहन में सवार लोगों को कम से कम क्षति होती है। वाहन सुरक्षित रहता है। कार में लगवाने में इसका खर्च 25 हजार तो बड़े वाहनों में एक लाख तक आता है, लेकिन बड़ी संख्या में उत्पादन हो तो इसकी कीमत कम हो जाएगी।
एक्सिडेंट रोधी सिस्टल का डायग्राम
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मदन मोहन कहते हैं देश में सालाना सवा दो लाख से अधिक सड़क हादसे होते हैं। जिसमें लाखों लोगों की मौत हो जाती है और करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। हादसों को रोकने के लिए ये उनका प्रयास है। अब सरकार से आर्थिक मदद मिले तो इसका व्यापक प्रयोग वाहनों में हो और जनधन हानि बचाई जाए। ऑस्ट्रेलिया की सरकार से 22 नवंबर 2018 से उनको इसका पेटेंट 2014362921 नंबर से मिला है जो बीस वर्ष के लिए मान्य है।
उन्होंने इसके आगे के विस्तार के लिए मदन इंड टेक्नोलाजिस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बीती 23 जनवरी 2019 को बनाई है। अब वह चाहते हैं कि स्टार्ट अप इंडिया में इसको शामिल कर बड़ी संख्या में वाहनों में प्रयोग किया जाए। अब तक वह अपने घर से खुद इसमें एक करोड़ से अधिक खर्च कर चुके हैं।
ऑनलाइन करें स्टार्ट अप आवेदन
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि उक्त प्रकरण में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 25 लाख का आवेदन ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स में गया था लेकिन मदन मोहन ने बाद में किसी कारणवश आपत्ति दर्ज कराई तो आवेदन लंबित हो गया। अगर वह स्टार्टअप में आवेदन करना चाहते हैं तो आनलाइन कर सकते हैं।