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Aligarh News: हल निकला..आगे भी ऐसे ही निकलेगी मां काली शोभायात्रा

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दुर्गा महारानी सेवा समिति की शोभायात्रा में शामिल महिलाएं। - फोटो : samvad
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महानगर के देहलीगेट चौराहे से निकाली जाने वाली मां काली शोभायात्रा व डोला के मार्ग को लेकर पिछले दो वर्ष से उपजे विवाद को बृहस्पतिवार रात विराम लगा दिया गया। हल निकाला गया है कि आगामी वर्ष में भी यह शोभायात्रा इसी तरह निकाली जाएगी। मगर उसके लिए आयोजकों द्वारा पहले 54 वर्ष पुराने परंपरागत मार्ग को लेकर अनुमति मांगी जाएगी। जिस पर एक समिति की संस्तुति के आधार पर शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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इस शोभायात्रा के मार्ग को लेकर पिछले वर्ष विवाद शुरू हुआ। बिना अनुमति जबरन शोभायात्रा निकालने पर आयोजकों पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इस बार अनुमति न मिलने पर विवाद शुरू हुआ। हंगामा, विरोध व विवाद के बीच बृहस्पतिवार शाम यह विषय भाजपा संगठन के पूर्व व वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ संघ के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद संघ के बड़े पदाधिकारियों के साथ-साथ जिले के प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय अधिकारियों से लेकर शासन के अधिकारियों तक से वार्ता की। जिसमें मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव से वार्ता हुई। उनके समक्ष पूरा विषय रखा गया। जिसमें इस बात पर सहमति बनी कि इस बार शोभायात्रा का सिर्फ मुख्य डोला 54 वर्ष पुराने मार्ग से निकाल लिया जाए। आगामी वर्ष में इसे 100 वर्ष पुराने परंपरागत मार्ग से निकालने के लिए मार्ग परिवर्तन पर पहले से होमवर्क कर लिया जाए। इस मामले में शासन को संज्ञान में लेकर मार्ग परिवर्तन पर निर्णय लेकर शोभायात्रा निकलवाई जाए। इसके बाद रात में इस फैसले पर अंतिम मोहर लगी।

विवाद एक नजर में



-100 वर्ष से पुराना है मां काली शोभायात्रा का यह आयोजन



-54 वर्ष पहले 1972 में दंगों के बाद मार्ग परिवर्तित किया था



-1978 से शोभायात्रा कटरा मार्ग से होकर निकाली जाने लगी



-53 वर्ष बाद 2025 में फिर पुराने मार्ग पर निकालने से विवाद



-2026 में इस विवाद को 54 वर्ष बाद दे दिया गया है विराम







इसलिए बदले थे शहर में ऐसे धार्मिक आयोजनों के मार्ग



पुलिस रिकार्ड व पुराने जानकारों के अनुसार वर्ष 1972 में लोकसभा चुनाव के दौरान पुराने शहर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। उस समय कर्फ्यू के चलते देहली गेट से निकलकर कनवरीगंज से सब्जी मंडी के रास्ते शहर में निकाली जाने वाली इस शोभायात्रा सहित उस समय के अन्य सभी आयोजनों पर रोक लगाई गई। बाद में शोभायात्रा को स्थानीय प्रशासन ने कटरा में होकर निकलवाना शुरू कर दिया। इसके बाद 1978 में भूरा पहलवान हत्याकांड के बाद लंबे समय तक शहर दंगों व कर्फ्यू के चपेट में रहा। तब शासन ने जस्टिस माथुर आयोग का गठन कर शहर के सुरक्षा प्रबंधन पर रिपोर्ट तैयार कराई। उस रिपोर्ट में शहर में 9 स्थानों पर स्थायी रूप से पीएसी तैनाती के साथ-साथ इस शोभायात्रा के अलावा जयगंज की रंगभरनी एकादशी की शोभायात्रा सहित अलम-ताजियों के मार्ग परिवर्तित करने की सिफारिश थी। उसी को शासन ने कानून व्यवस्था के मद्देनजर लागू कर व्यवस्था सुचारू कराई थी।
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शोभायात्रा इस बार सकुशल निकाली गई है। डोला को परिवर्तित मार्ग से निकलवाया गया है। बाकी आगामी वर्ष के लिए मार्ग परिवर्तन पर अनुमति के समय एक समिति के जरिये रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। उसके आधार पर शोभायात्रा सभी व्यवस्थाएं मुकम्मल कर निकलवाई जाएगी।
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संजीव रंजन, डीएम
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