पाकिस्तान में जोश मलिहाबादी पर की गई तनकीद (आलोचना) का काजी अब्दुल सत्तार ने करारा जवाब दिया था। इसका जिक्र साहित्यकार प्रेम कुमार ने उनके साक्षात्कार पर आधारित अपनी पुस्तक “बातों-मुलाकातों में काजी अब्दुल सत्तार” में किया है। इसी किताब का एक अंश देखें - '' किसी का अहद-ए-जवानी में पारसा होना / कसम खुदा की ये तौहीन है जवानी की! जोश मलिहाबादी, मिर्जा गालिब के बाद की कतार के उन कम शायरों में से थे, जिनमें जमाने को देखने, दिखाने का सलीका और शऊर था। जन्मे तो अवध प्रांत के लखनऊ (मलिहाबाद) में, लेकिन साठ साल तक हिंदुस्तान में रहने के बाद अचानक पाकिस्तान जाने की तैयारी कर ली। फिर तो पंडित नेहरू के मनाने पर भी नहीं माने। जोश के बहुत हमनवां दोस्त और हिमायती थे उपन्यासकार काजी अब्दुल सत्तार।
' यादों की बारात ' शीर्षक से
जोश की आत्मकथा प्रकाशित हुई तो कुछ पाकिस्तानी आलोचकों ने उसमें कुछ झूठे होने का आरोप लगा दिया। फिर तो काजी अब्दुल सत्तार, उनको उनके ही मुंह से बहुत कंगाल होना कबूल करवाते हुए, आलोचकों पर चढ़ बैठे। जानते हो, मलिहाबाद के तालुकेदार के बेटे थे जोश! तालुकेदार की हैसियत - गुड़गुड़ी, तुड़तुड़ी, हाथी, पतुरिया, कर्जा, घंटा और अदालत, जिस तालुकेदार की रिहाइश में न हो वह तालुकेदार नहीं। गुड़गुड़ी माने हुक्का तो तुड़तुड़ी = गाली देने वालीजबान, तालुकेदार अस्सी साल का हो तब भी खिदमत में पततुरिया रहेगी सोलह साल की ही। तुम्हारी औकात कि तुम जोश को झूठा बता दो! जोश के मयार और काजी की बेबाकी को सलाम।
एएमयू के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमरुल हुदा फरीदी ने कहा कि कुछ लोगों की शख्सियत ऐसी होती है कि उन्हें देखकर आप प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे काजी अब्दुल सत्तार थे। वह अंदर और बाहर से एक मजबूत इंसान थे। काजी अब्दुल सत्तार के उपन्यास में उनकी जिंदादिली और बेबाक जिंदगी का अक्स दिखता है। अपने सिद्धांत से कभी समझौता नहीं किया। शिक्षक बेहतर थे। पढ़ाने का अंदाज अलहदा था। पढ़ाने के दौरान उस वक्त की तस्वीरें खींच देते थे। मानो आंखों के सामने वह मंजर चल रहा हो।
उपन्यास और कहानियों में जमींदारी का अक्स : प्रो. तारिक
एएमयू के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. तारिक छतारी ने कहा कि काजी अब्दुल सत्तार के उपन्यास और कहानियों में जमींदारी का अक्स दिखता है। आधुनिक और परंपरागत दोनों जगह उनकी कहानियों और उपन्यास में देखने को मिलता है। उनके उपन्यास में ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र है। वह उस दौर की बातों को आज से जोड़कर लिखते थे।