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अलीगढ़ : ‘रामलीला’ के विरोध में दर्ज हुआ था लूट का मुकदमा, भाजपा नेता बरी

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बहुचर्चित हिंदी फिल्म रामलीला के नाम को लेकर देश भर में विरोध के क्रम में अलीगढ़ में एबीवीपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कई छात्र नेताओं पर लूट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में आरोपी भाजपा नेता सौरभ चौधरी व संजू बजाज को अदालत से बरी कर दिया गया है। यह फैसला एडीजे-7 की अदालत से सुनाया गया है, जिसमें गवाहों के आरोपियों को न पहचानने संबंधी बयान पर संदेह का लाभ देते हुए दोनों को बरी किया गया है।
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यह प्रकरण 16 नवंबर 2013 का है, जब एबीवीपी के नेतृत्व में काफी संख्या में छात्रों ने फिल्म के नाम को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। पहले प्रदर्शनकारी टीम बारहद्वारी वाड्रा सिनेमा पहुंची थी। फिर वहां से मीनाक्षी सिनेमाघर आई। यहां प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ तक हुई थी। मामले में मीनाक्षी सिनेमा के मैनेजर सुधीर सिसोदिया की ओर से सिविल लाइंस में एबीवीपी के तत्कालीन जिला संयोजक सौरभ चौधरी (वर्तमान में भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष) व सह संयोजक संजू बजाज (वर्तमान में भाजपा महानगर मंत्री) सहित दस नामजद व 140 करीब अज्ञात के खिलाफ लूट, मारपीट आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें मारपीट करने व कैंटीन काउंटर व टिकट काउंटर से लूट का आरोप लगाया। दौरान-ए-विवेचना पुलिस ने सिर्फ सौरभ चौधरी व संजू बजाज के खिलाफ लूट के आरोप में चार्जशीट भेजी। बाकी नामजदों के नाम निकाल दिए।
इस मुकदमे का ट्रायल एडीजे-7 की अदालत में चला। जहां आधा दर्जन में से दो गवाह वादी व एक अन्य ने जरूर अपनी तहरीर के बयान संबंधी गवाही दी, जबकि टिकट काउंटर व कैंटिन संबंधी गवाह आरोपियों को पहचान नहीं सके और कोई लूट न होने की बात स्वीकारी। इस तरह गवाहों के बयानों में भिन्नता के चलते संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने दोनों को मंगलवार को बरी कर दिया। इस मामले में एडीजीसी तरुण वर्मा ने पुष्टि की है।
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- गवाहों के बयानों में शुरुआत से ही भिन्नता थी। हमने इसी को आधार बताकर न्यायालय में दलील दी कि भीड़ ने सिनेमा के बाहर प्रदर्शन किया। मगर कहीं कोई लूट नहीं हुई। न्यायालय ने इसी दलील पर मुकदमे से हमारे पक्ष को राहत दी है।-जगदीश सारस्वत, बार अध्यक्ष, बचाव पक्ष के वकील
न्यायालय से हुई सच्चाई की जीत, मिली बड़ी राहत
इस मामले में आरोपी सौरभ चौधरी व संजू बजाज ने बताया कि भीड़ के रूप में प्रदर्शन हुआ। हमने सिर्फ विरोध जताया। लूट के झूठे आरोप में उस समय पुलिस ने हमें जेल भेजा था। मगर न्यायालय में सच्चाई की जीत हुई है। हमें लूट के आरोप से बड़ी राहत मिली है। इधर, मंगलवार को इस फैसले के बाद समर्थकों ने दीवानी में ही दोनों का स्वागत किया और हर्ष जताया।
हिंदू संगठनों ने किया था देश भर में विरोध, तब बदला नाम
इस फिल्म का नाम रामलीला होने को लेकर हिंदू संगठनों ने देश भर में विरोध किया था। अपने शहर में एबीवीपी ने विरोध करते हुए दलील दी कि इस तरह की फिल्म का नाम भगवान राम के नाम होने से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। देश भर में विरोध के चलते महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया और फिल्म का नाम रामलीला से बदलकर गोलियों की रासलीला किया था।
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