मक्का और बाजरा उत्पादन करने वाले जिले के किसानों को आगामी समय में अपनी फसल बाजार के आधे दामों पर नहीं बेचनी पड़ेगी। जिले में गेहूं धान की तरह ही मक्का और बाजरा खरीद के लिए सरकारी क्रय केंद्र खोले जाएंगे। बृहस्पतिवार को डीएम ने कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ हुई राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी में यह प्रस्ताव रखा है। आयुक्त ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज मंजूरी दिलाने का आश्वासन दिया है।
प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन एनआईसी योजना भवन लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुआ। जिले के अधिकारी एनआईसी में बैठ गोष्ठी से जुड़े। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने एपीसी को बताया कि जनपद में खरीफ फसलों में मक्का और बाजरा की बोआई प्रमुखता से की जाती है। फसल उत्पादन भी काफी बेहतर होता है। बाजार में मक्का-बाजरा की बिक्री दर 1100-1200 रुपये प्रति कुंतल है, जबकि समर्थन मूल्य मक्का का 1860 रुपये एवं बाजरा का 2150 रुपये एवं धान का 1868 रुपये निर्धारित है। बाजारा के खरीदारों की मनमानी के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। यदि गेंहू व धान की तरह मक्का-बाजरा के क्रय केंद्र भी जिले में खोल दिए जाएं तो किसानों को उपज का सही मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इस पर आयुक्त ने प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने की सहमति जाहिर की।
वहीं, डीएम ने आंकड़े पेश करते हुए उन्हें बताया कि रबी की फसल में वर्ष 2020-21 के लिए जनपद का लक्ष्य 257242 हेक्टेयर रखा गया है, जिसमें गेंहू 224880 हेक्टेयर, जौ 7947 हेक्टेयर चना 23 हेक्टेयर, मटर 151 हेक्टेयर, मसूर 1042 हेक्टेयर, सरसों 21123 हेक्टेयर एवं तोरिया 2075 हेक्टेयर बोआई का लक्ष्य प्रस्तावित है। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष के लिए फसली ऋण वितरण का लक्ष्य 249135.24 लाख रुपये प्रस्तावित किया गया है, जिसमें व्यावसायिक लक्ष्य 246675 एवं सहकारी बैंक का 2460 लाख रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार केसीसी कार्ड वितरण का लक्ष्य 154540 का रखा गया है। इस दौरान सीडीओ, पीडी डीआरडीए, उपनिदेशक कृषि, सीवीओ, जिला उद्यान अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, एलडीएम सहित जनपद के प्रगतिशील कृषकों ने प्रतिभाग किया।