महानगर के लालडिग्गी रोड पर रोडरेज की वारदात में गोली से जख्मी अनम असलम दिल्ली स्थित एम्स में नौ दिन तक मौत से लड़ते-लड़ते जिंदगी की जंग हार गई। उसने मंगलवार शाम सवा सात बजे आखिरी सांस ली। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
ऊपरकोट पर भी शोक की लहर दौड़ गई। इधर, देर रात परिवार वाले अनम का पोस्टमार्टम न कराने की जिद पर अड़ गए और इसके लिए उसके पिता असलम खान ने एसएसपी राजेश पांडेय से भी मुलाकात की। चूंकि निर्णय दिल्ली पुलिस से वार्ता के बाद ही होना था, इसलिए तय किया गया कि इंस्पेक्टर सिविल लाइंस परिवार के साथ शव लेने दिल्ली जाएंगे और वहां की पुलिस से वार्ता कर जो तय होगा, वही किया जाएगा। देर रात ये लोग दिल्ली रवाना हो गए। बुधवार को अनम का शव आएगा। इधर, इस मुकदमे के मुख्य आरोपी नासिर को मंगलवार दोपहर पुलिस ने जेल भेज दिया।
8 फरवरी को दोपहर डेढ़ बजे एएमयू वीमेंस कॉलेज की छुट्टी के बाद वैन चालक हबीब निवासी जमालपुर सिविल लाइंस एक दर्जन छात्राओं को पुराने शहर के ऊपरकोट इलाके में छोड़ने जा रहा था। लालडिग्गी रोड पर एनएसएस दफ्तर के सामने उसकी वैन से एक बाइक टकराने पर हुए विवाद में बाइक सवारों ने हबीब पर फायरिंग कर दी। गोली हबीब के बजाय वैन में सवार 5वीं की 13 वर्षीय छात्रा अनस असलम पुत्री मो. असलम निवासी मोहल्ला शेखरान ऊपरकोट कोतवाली के सिर में जा धंसी।
अनम को जेएन मेडिकल कॉलेज और वहां से शाम को दिल्ली एम्स ले जाया गया। डॉक्टर उसके सिर में फंसी गोली न निकाल सके और कोमा में जाने के डर से ऑपरेशन नहीं हो सका। सोमवार दोपहर अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। उसे वेंटिलेटर पर ले लिया गया था। मंगलवार शाम डॉक्टरोें ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिस वक्त मौत हुई, उस वक्त पिता अलीगढ़ में अपने घर पर थे। पिता ने समाज सेवी गुलजार अहमद के साथ एसएसपी से मुलाकात की।
मुकदमे से पीछे हटने को भी तैयार परिवार
बच्ची की मौत के बाद जब परिवार को समझाया गया कि पोस्टमार्टम नहीं कराया तो मुकदमा कमजोर साबित होगा। तो पिता ने कह दिया कि साहब मुकदमा वापस लेने को तैयार हैं। मगर इतनी छोटी बच्ची की लाश का पोस्टमार्टम ठीक नहीं है।
न दुआ लगी न दवा
परिवार से लेकर एएमयू गर्ल्स स्कूल की शिक्षिकाएं-छात्राएं अनम के लिए दुआएं कर रही थीं। शहर मुफ्ती तक ने दुआ कराई। जुमे की नमाज में भी उसके लिए दुआ की गई। एएमयू स्टाफ, छात्रसंघ आदि ने भी परिवार को इलाज में मदद के लिए हर संभव साथ निभाया। मगर कुछ काम नहीं आया।
आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही पुलिस
इस वारदात में सबसे खेदजनक पहलू यह है कि पुलिस अनम के एक भी कातिल को न पकड़ सकी। वह तो एक आरोपी नासिर खुद ही गोली लगने पर मेडिकल कॉलेज पहुंच गया। इसके बाद उसने अपने साथियों के नाम उजागर कर दिए। मगर आज तक पुलिस उन्हें भी न पकड़ सकी। इसे पुलिस की असफलता ही कहा जाएगा। वहीं छर्रा के पूर्व विधायक राकेश सिंह का कहना था कि भाजपा के राज में हर ओर अपराध का माहौल है। पुलिस हत्यारों को पकड़ने में नाकाम रही। उधर, बुधवार को जनता के आक्रोश को देखते हुए इंस्पेक्टर कोतवाली को अनम के घर पर तैनात कर दिया गया है।
परिवार को समझाया गया है कि अगर बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं कराया, तो केस बिगड़ेगा। दिल्ली पुलिस से बुधवार को बात की जाएगी। परिवार जैसा चाहेगा, वह तय किया जाएगा। - राजेश पांडेय एसएसपी
वर्जन
- अनम के इंतकाल की खबर सुनकर मुझे बेहद अफसोस है। अल्लाह उसके घर वालों को सब्र अता करे। उसके हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।
-मोहम्मद खालिद हमीद, शहर मुफ्ती।
मैं अनम को भूल नहीं पाऊंगी। वह पढ़ने में काफी होशियार थी। इतनी कम उम्र में उसका यूं बिछड़ना काफी तकलीफदेह है। आज उसके लिए दुआए मगफिरत की जाएगी।
आमना मलिक, प्रिंसिपल, एएमयू गर्ल्स स्कूल।