हालांकि परिवार बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराने को सहमत नहीं हुआ। मगर इस बयान के आधार पर आरोपी को जेल भेजा गया। साथ में चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में इसी मामले में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोषी को सजा सुनाई है। साथ में विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव को बच्ची के परिवार को नियमानुसार आर्थिक मदद की संस्तुति भी की है।
इस तरह पूरी हुई जांच
सीबीआई टीम को जब यह वीडियो व ईमेल की जानकारी हुई तो जांच में साक्ष्य जुटाते हुए 12 अगस्त को मुकदमा दर्ज किया। फिर टीम सर्च वारंट लेकर उसके घर पहुंची। जहां अपने साथ गवाही के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक सैय्यद एम, सहायक प्रबंधक अंकित कुमार को लेकर गई। जहां से आरोपी के मोबाइल, सिम, डेटा कार्ड, ड्राइव आदि बरामद किए। इसके बाद बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। फिर 6 सितंबर को आरोपी को गभाना थाने से ही जेल भेजा गया। मामले में चार्जशीट पर न्यायालय ने 13 नवंबर को संज्ञान लिया। 21 फरवरी 2025 से आरोप तय होकर ट्रायल शुरू हुआ।