राष्ट्रीय लोक अदालत में दंपती का सात साल पुराना विवाद निपटाया गया। मनमुटाव दूर होने पर मायके रह रही पत्नी हंसी-खुशी पति के साथ लौट गई। इसी तरह के कुल 63 अन्य मामले निपटाए गए। वर्षों से अदालतों के चक्कर काट रहे दोनों पक्षों के लोगों को राहत मिली। सभी जोड़ों को माला पहनाकर व मिष्ठान खिलाकर हंसी-खुशी से विदा किया गया। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रणवीर सिंह ने 63 परिवारों को जोड़ा और कुल 302 वाद निस्तारित किए गए।
स्थायी लोक अदालत में 18 वाद निपटाए गए
स्थायी लोक अदालत की पीठ में अध्यक्ष शंकरलाल, वरिष्ठ सदस्य सत्यदेव, सदस्य आरती ने सुलह-समझौते के आधार पर 18 वादों का निस्तारण कराया। अवार्ड धनराशि 7,77,700 का अर्थदंड वसूला।
ये रहे मौजूद
लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी वाणिज्यिक न्यायालय विवेक त्रिपाठी, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रणधीर सिंह, पीठासीन अधिकारी मोटरयान दावा अधिकरण जय सिंह पुंढीर, एडीजे सुरेन्द्र मोहन सहाय, संजय कुमार यादव, ऋषि कुमार, अभिषेक कुमार बागड़िया, पारुल अत्री, रवीश अत्री, नवल किशोर सिंह, प्रदीप कुमार राम, विनय तिवारी, ललिता गुप्ता, नूपुर, ज्ञानेन्द्र सिंह, ज्योति सिंह, अमित कुमार तिवारी, वीरेन्द्र नाथ पांडेय, राजीव शुक्ला, अंजू राजपूत, राघवेंद्र मणि, अशोक कुमार सिंह, सीजेएम शिवम कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रेलवे मजिस्ट्रेट शिवांक सिंह आदि तमाम न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे और वादों की सुनवाई की। यहां अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय चतुर्थ ललिता गुप्ता, अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय प्रथम नूपुर, अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय तृतीय ज्योति सिंह, अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय द्वितीय ज्ञानेंद्र सिंह मौजूद रहे। परिवार न्यायालय के काउंसलर योगेश सारस्वत, योगेश शंकर भारद्वाज, अनीता गर्ग, यतेंद्र कुमार, मीडिएटर योगेंद्र उपाध्याय, नरेंद्र कुमार, शबनम फातिमा, सुमन वर्मा भी उपस्थित रहे।