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Good News: अलीगढ़-मुरादाबाद हाईस्पीड कॉरिडोर के लिए होगा जमीन अधिग्रहण, इन 47 गांव से निकलेगा, देखिए लिस्ट

Thu, 04 Jun 2026 01:00 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

इस हाईस्पीड कॉरिडोर के बन जाने से न सिर्फ अलीगढ़ और मुरादाबाद के बीच की दूरी और समय बेहद कम हो जाएगा, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारिक और औद्योगिक विकास के लिए जीवन रेखा साबित होगा।
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प्रस्तावित अलीगढ़-मुरादाबाद हाईस्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर - फोटो : एआई
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और परिवहन को रफ्तार देने के लिए प्रस्तावित अलीगढ़-मुरादाबाद हाईस्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर जिले के 47 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी है।

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एनएचएआई के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार ने डीएम अलीगढ़ को पत्र भेजकर कॉरिडोर के दायरे में आने वाले 47 गांवों के राजस्व मानचित्र और अन्य आवश्यक भूमि रिकार्ड तत्काल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। यह राजस्व गांव तहसील कोल और तहसील गभाना में हैं। एनएचएआई ने इस ग्रीनफील्ड हाईवे की डीपीआर और डिजाइन तैयार करने का जिम्मा मैसर्स चैतन्या प्रोजेक्ट्स कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स श्री भवानी कंसलटेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा है। इस कॉरिडोर के एलाइनमेंट को पहले ही हरी झंडी दी जा चुकी है।

एनएचएआई ने पत्र में स्पष्ट किया है कि कॉरिडोर का रूट अलीगढ़ के कई गांवों से होकर गुजरेगा। जमीन की पैमाइश और अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई को समय से पूरा करने के लिए कंसलटेंसी कंपनियों के चार अधिकृत प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें रजित ठाकुर, प्रीतेश्वर पटेल, अबलेंद्र प्रताप और हितेश कौशिक शामिल हैं। ये प्रतिनिधि सीधे अलीगढ़ के राजस्व अधिकारियों, तहसीलदार और लेखपालों से संपर्क कर प्रभावित गांवों के विलेज मैप और जमीन से जुड़ी अन्य जानकारियां हासिल करेंगे, ताकि इन्हें हाईवे के फाइनल डिजाइन और डीपीआर में शामिल किया जा सके।

जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे अपने राजस्व अधिकारियों को त्वरित निर्देश जारी करें ताकि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में कोई देरी न हो। प्रशासन की ओर से विलेज मैप मिलते ही प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और जमीन पर कब्जा लेने की अगली प्रक्रिया, नोटिफिकेशन आदि शुरू कर दी जाएगी। - अरविंद कुमार, पीडी, एनएचएआई

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इन गांवों की जमीन का होगा अधिग्रहण
परियोजना के शुरुआती चरण में किमी 0.00 से किमी 33.380 के तहत कलक्ट्रेट को सौंपी गई सूची के अनुसार, अलीगढ़ की दो प्रमुख तहसीलों कोल और गभाना के गांव इस हाईस्पीड कॉरिडोर से सीधे प्रभावित होंगे।
  • गभाना तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव- कौरह रुस्तमपुर, पला सल्लू, सांगोर, खेरिया हैवत खान, गिरधरपुर, दाऊपुर कोटा, कुलवा, सुमेरपुर, अमरौली, समस्तपुर कोटा, ओरिहा, सुमेरा दरियापुर, तेजपुर और पिलौना।
  • कोल तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव- कस्तली वैस, पला माजरा कस्तली वैस, चन्दौखा, छेरत-सुढि़याल, साथा, खेरूपूरा, सपेरा भानपुर, जटपुरा, किढ़ारा, मोरथल, बरौठा, मोहनपुर, हरदुआगंज, नयावास नरेंद्र गढ़ी, आज़माबाद माछुआ, सिकंदरपुर माछुआ, इमलानी, मई, खान आलमपुर, चंगेरी, महमूदपुर जमालपुर, भोजपुर, अलहदादपुर, पनैठी, अधौन, जुलुपुर सिहोर, भगवानपुर, फरीदपुर और जवां सिकंदरपुर।

स्थानीय विकास और कनेक्टिविटी को लगेंगे पंख
इस हाईस्पीड कॉरिडोर के बन जाने से न सिर्फ अलीगढ़ और मुरादाबाद के बीच की दूरी और समय बेहद कम हो जाएगा, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारिक और औद्योगिक विकास के लिए जीवन रेखा साबित होगा। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होने के कारण इसके आसपास नए लॉजिस्टिक पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने की भी प्रबल संभावनाएं हैं।
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