फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज मत जाओ: रखा रह गया सुबह का निवाला, छूट गया महेंद्र का भारती संग 15 साल का साथ

Sun, 26 Apr 2026 11:13 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जब मलखान सिंह जिला अस्पताल में भारती ने अपने पति की निर्जीव देह देखी, तो वह बदहवास बार-बार यही कह रही थी, कि अगर उसने सुबह रोक लिया होता..., अगर उन्होंने खाना खा लिया होता...।
विज्ञापन
महेंद्र सिंह की मौत के बाद विलाप करती पत्नी भारती व अन्य परिजन - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ के बरौला बाईपास से 25 अप्रैल की सुबह रेलवे रोड पर काम के लिए निकले महेंद्र सिंह (35) को क्या पता था कि जिस मिट्टी को वह शहर की प्यास बुझाने के लिए खोद रहा है, वही मिट्टी उसकी जिंदगी की आखिरी सेज बन जाएगी। काम पर जाने की जल्दबाजी में पत्नी के बार-बार कहने पर भी वह भूखे पेट ही निकल गए थे।

विज्ञापन


25 अप्रैल की सुबह 6 बजे जब सूरज की पहली किरण ने दस्तक दी, तो महेंद्र के मोबाइल की घंटी बजी। दूसरी तरफ से काम पर आने का बुलावा था। भीषण गर्मी और थकान को देखते हुए पत्नी भारती ने किसी अनजान डर की आशंका पर कहा भी- आज मत जाओ। दो दिन से बहुत गर्मी पड़ रही है। शरीर साथ नहीं देगा, लेकिन महेंद्र ने कहा जाना होगा, जेई साहब का फोन आया है।

भारती ने बार-बार खाने के लिए टोका, चाहा कि पति दो निवाले खाकर घर से निकले, लेकिन महेंद्र को जल्दी थी। वह बिना कुछ खाए, खाली पेट ही घर से निकल गया। उसे क्या पता था कि घर की दहलीज लांघते वक्त उसका यह जल्दी जाना परिवार से हमेशा के लिए दूर जाना बन जाएगा। दोपहर 3.30 बजे जब खबर आई, तो वह खाने की थाली नहीं बल्कि अस्पताल पहुंचने का बुलावा था।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

महेंद्र और भारती की कहानी सिर्फ एक मजदूर और उसकी पत्नी की कहानी नहीं है। 15 साल पहले दोनों ने दुनिया की परवाह न करते हुए प्रेम विवाह किया था। अपनों से अलग होकर बरौला बाईपास पर किराए के एक छोटे से कमरे में वे अपनी छोटी सी दुनिया सजा रहे थे। मेहनत-मजदूरी से मिलने वाले चंद रुपयों से वे अपने एक बेटे और एक बेटी के सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे थे।

शनिवार को उस 15 फीट गहरे गड्ढे की गीली मिट्टी ने सिर्फ महेंद्र को नहीं दबाया, बल्कि भारती के 15 साल के संघर्ष, उसके सिंदूर और बच्चों के सिर से पिता के साये को भी दफन कर दिया। जब मलखान सिंह जिला अस्पताल में भारती ने अपने पति की निर्जीव देह देखी, तो वह बदहवास बार-बार यही कह रही थी, कि अगर उसने सुबह रोक लिया होता..., अगर उन्होंने खाना खा लिया होता...।

महेंद्र के चार भाई और है, लेकिन भारती के लिए तो महेंद्र ही पूरी कायनात था, जो एक दर्दनाक हादसे की भेंट चढ़ चुके हैं। शहर की पाइप लाइन तो शायद कुछ दिनों में ठीक हो जाए, लेकिन इस परिवार की जो खुशियां उस मलबे में दबी हैं, उनकी मरम्मत अब कभी नहीं हो पाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें