महेंद्र और भारती की कहानी सिर्फ एक मजदूर और उसकी पत्नी की कहानी नहीं है। 15 साल पहले दोनों ने दुनिया की परवाह न करते हुए प्रेम विवाह किया था। अपनों से अलग होकर बरौला बाईपास पर किराए के एक छोटे से कमरे में वे अपनी छोटी सी दुनिया सजा रहे थे। मेहनत-मजदूरी से मिलने वाले चंद रुपयों से वे अपने एक बेटे और एक बेटी के सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे थे।
शनिवार को उस 15 फीट गहरे गड्ढे की गीली मिट्टी ने सिर्फ महेंद्र को नहीं दबाया, बल्कि भारती के 15 साल के संघर्ष, उसके सिंदूर और बच्चों के सिर से पिता के साये को भी दफन कर दिया। जब मलखान सिंह जिला अस्पताल में भारती ने अपने पति की निर्जीव देह देखी, तो वह बदहवास बार-बार यही कह रही थी, कि अगर उसने सुबह रोक लिया होता..., अगर उन्होंने खाना खा लिया होता...।
महेंद्र के चार भाई और है, लेकिन भारती के लिए तो महेंद्र ही पूरी कायनात था, जो एक दर्दनाक हादसे की भेंट चढ़ चुके हैं। शहर की पाइप लाइन तो शायद कुछ दिनों में ठीक हो जाए, लेकिन इस परिवार की जो खुशियां उस मलबे में दबी हैं, उनकी मरम्मत अब कभी नहीं हो पाएगी।