बीते कुछ दिनों से अमेठी के आरिफ और उनके पालतू सारस की चर्चा है। इस मामले में आरिफ के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। सारस उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है, जिसे पालना नियम विरुद्ध है। यही नहीं निजी शौक के लिए कोई भी वन्य जीव पाला नहीं जा सकता है। चाहे उसे कितनी ही सुख सुविधा के बीच क्यों न रखा जाए।
भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम कहता है कि सिर्फ दूध देने और कृषि प्रयोग वाले पशुओं को ही पाला जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य जीव को पाला नहीं जा सकता। अगर कोई पाल रहा है और उसकी शिकायत होती है तो वन विभाग कार्रवाई कर सकता है।
पुराने समय में शौक के लिए हाथी, घोड़ा, ऊंट, बिल्ली, उल्लू, कुत्ता, मछली, तोता, कई प्रकार की सुंदर चिड़िया आदि पाले जाते थे। कुछ जीव व्यापार के लिए पाले जाने लगे, जिनमें हाथी, घोड़ा, ऊंट, भालू, शेर-चीता, तोता, मोर, उल्लू, कुत्ता आदि शामिल हैं। मगर 1972 में बने भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत इनके पालने के कुछ प्रावधान और लाइसेंस जारी करने का कानून बना। इस नियम में 2002 में संशोधन हुआ और उसके प्रावधान जटिल किए गए।
वन्य जीव विषय के जानकार रंजन राना बताते हैं कि दूध देने वाले या कृषि प्रयोग वाले जानवरों के अलावा कोई भी वन्य जीव पाला नहीं जा सकता। अमेठी के सारस प्रकरण की बात करें तो उसे पालना नियम विरुद्ध है। सारस को बिना जोड़े के नहीं रखा जाना चाहिए। वह हमेशा जोड़े में ही रहना पसंद करता है। अगर जोड़े से अलग किया गया तो यह और बड़ा अपराध है।
कोई भी वन्य जीव पाला नहीं जा सकता। सिर्फ दूध देने वाले और कृषि प्रयोग वाले ही जीव पाले जा सकते हैं। कुछ जीवों को पालने पर लाइसेंस लिए जाते हैं। मगर अलीगढ़ में ऐसा कोई लाइसेंस नहीं है। हाथी का भी लाइसेंस नहीं है।
-दिवाकर वाशिष्ठ, जिला वन अधिकारी