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अलीगढ़ नुमाइशः मुक्ताकाश मंच पर अपनी रचना सुनाकर कवियों ने बांधा समा

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मुक्ताकाश मंच पर साहित्यकार सम्मेलन में कविता सुनाते कवि प्रेम किशोर पटाखा। - फोटो : CITY OFFICE
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शिखर साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में शुक्रवार को नुमाइश के मुक्ताकाश मंच पर साहित्यकार सम्मेलन साहित्योत्सव 2021 का आयोजन किया। अध्यक्षता प्रख्यात व्यंग्यकार अशोक अंजुम तथा संचालन उस्ताद शायर मुजीब शहजर ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया गया। व्यंग्य व हास्य के सशक्त हस्ताक्षर प्रेम किशोर पटाखा ने सरस्वती वंदना करके सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यहां कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समा बांधा।
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अशोक अंजुम ने दीन के ईमान के होकर रहो, राम के रहमान के होकर रहो, किन्तु पहले ध्यान अंजुम ये रहे, आप हिंदुस्तान के होकर रहो.. पंक्तियां पढ़ीं। प्रेम किशोर पटाखा ने सुबह अखबार सुर्खियां लूटमार सन्नाटा, महंगाई भी चीरहरण कर मार रही हैं चांटा.. रचना पढ़ी। साहित्यकारों को समाज का दर्पण बताते हुए ओजस्वी कवि हरीश बेताब ने कवि का शब्द-शब्द हो जाता है उस क्षण कविता, जब वह जग की पीड़ाओं को सहने लगता है रचना पढ़ी। डॉ. मुजीब शहजर ने भाई ने भाई के जख्मों पे दवा रखी थी, आज की बात ना कर पिछले जमाने होंगे.. रचना पढ़ी। ओम प्रकाश सिंह एडवोकेट ने जिनकी औकात दो कौड़ी की नहीं थी पटेल बोस से वह महान हो गए रचना पढ़ी। डॉ. दौलत राम की दरिया में उतर गया अपनों के वास्ते, खुद टूट कर बिखर गया अपनों के वास्ते ने भी खूब सुर्खियां बंटोरी। सुधांशु गोस्वामी की जिनके दम पे वतन ये चमन हो गया, उनको जां से प्यारा वतन हो गया.. ने लोगों में जोश भरा। योगेश सेंगर ने जब तक सांस आखिरी है, भारत मां की जय बोलेंगे कविता पढ़ी तो सभी ने सराहना की। यहां श्यामसुंदर सिंह श्याम, नसीर नादान ने भी अपनी रचना पढ़ी। इस मौके पर अक्षय भारद्वाज, रश्मि चौधरी, रंजना चौधरी, रूपाली, भूपेंद्र शर्मा, सुनील शर्मा, खलीक शेरवानी, सोनू कुमार, दिलीप कुमार वर्मा, अंकित प्रताप सिंह, भूरा सिंह, एससी अस्थाना आदि मौजूद रहे।
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