जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवा बंद होन एवं परिजनों से संपर्क टूटने से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र भयभीत हैं। पैसे एवं डाक्यूमेंट आदि भी नहीं मंगा पा रहे हैं।
इस समय एएमयू में करीब 250 से 300 कश्मीर के छात्र मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त कुछ छात्र शहर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ते हैं। दो दिन से कश्मीर में इंटरनेट सेवा बंद होने से इनकी बात अपने परिजनों से नहीं हो रही है। वह कैसे और किस हाल में हैं, इसे जानने के लिए छात्र बेचैन हैं। तरह-तरह की आशंकाओं से भी घिरे हुए हैं। अभी दाखिला प्रक्रिया चल रही है।
एएमयू के पूर्व छात्र अमूद गुलजार का कहना है कि दाखिला के वक्त पैसे एवं डॉक्यूमेंट आदि की जरूरत पड़ती है। इंटरनेट सेवा रहने से पैसा एवं अन्य सामान मंगाने में दिक्कत नहीं होती है। नेट सेवा बंद होने से सभी परेशान हैं। उन्होंने वर्तमान स्थिति में जम्मू कश्मीर के छात्रों से शांति बनाए रखने तथा कानून हाथ में न लेने का आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि एएमयू में करीब एक हजार कश्मीर के छात्र पढ़ते हैं। बकरीद त्योहार के कारण करीब 70 प्रतिशत छात्र आए नहीं हैं। उनके बकरीद बाद आने की उम्मीद है।
अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा है। इसे हटाना असंवैधानिक है क्योंकि यह जम्मू कश्मीर को हिंदुस्तान से जोड़े रखने का एक प्रावधान है। इसमें परिवर्तन से जम्मू कश्मीर के लोगों को दिक्कतें होगी। इस बिल को पहले राज्य के विधान सभा में लाना चाहिए था। सरकार हिटलरशाही रवैया अपना रही है। अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए सरकार अलोकतांत्रिक कार्य कर रही है।
- अमूद गुलजार, कश्मीर निवासी एएमयू के पूर्व छात्र और सदस्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी जम्मू कश्मीर
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल की निंदा करता हूं। यह वास्तव में भारत के संवैधानिक इतिहास का काला दिन है, जैसा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा था। कश्मीर के लोगों के विश्वास जीतने में विफल रहने के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा रास्ता अपनाया है। हम कश्मीर के लोगों की गरिमा एवं अधिकारों पर हमले को हर संभव तरीके से चुनौती देंगे। वहां के छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए लड़ें।
- सलमान इम्तियाज, निवर्तमान अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ