जिले में कन्या सुमंगला योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। इस योजना में मिले एक लाख के लक्ष्य के सापेक्ष पिछले दो साल में तमाम कोशिशों के बाद भी 20 हजार लाभार्थी तलाशे जा सके हैं। अफसरों का दावा है कि योजना में दो बच्चों के नियम के चलते लोग इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। देहात क्षेत्र में अधिकांश परिवारों में दो से अधिक बच्चे होते हैं। ऐसे में आवेदन जांच पड़ताल के बाद निरस्त कर दिए जाते हैं।
प्रदेश सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना को बढ़ावा देने के लिए गरीब परिवार में जन्म लेने वाली बेटियों की उचित देखरेख एवं उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने का निर्णय लेते हुए दो साल पहले कन्या सुमंगला योजना की शुरुआत की थी। योजना में बेटी के जन्म के समय दो हजार, एक साल बाद एक हजार, कक्षा एक में दाखिला लेने पर दो हजार, कक्षा छह में दाखिला लेने पर दो हजार, कक्षा नौ में दाखिला लेने पर तीन हजार और स्नातक में दाखिला लेने पर पांच हजार रुपये मिलते हैं। छह चरणों में करीब 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलने के बाद भी लाभार्थी रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
ये है मानक
- योजना में लाभ पाने के लिए लाभार्थी का प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। उसके पास स्थायी प्रमाणपत्र, आधार कार्ड या अन्य कोई पहचान पत्र होना चाहिए।
- वार्षिक आय अधिकतम तीन लाख रुपये से अधिक न हो।
- परिवार की अधिकतम दो बच्चियों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
- परिवार में अधिकतम दो बच्चे होने चाहिए।
- यदि किसी महिला को पहली बालिका व द्वितीय प्रसव से दो जुड़वा बालिकाएं होती हैं तो ऐसी स्थिति में तीनों बालिकाओं को योजना लाभ दिया जाएगा।
जिले में कन्या सुमंगला योजना में करीब 20 हजार लाभार्थियों को लाभ दिया जा चुका है। आवेदन के बाद पात्र मिलने पर छह श्रेणियों में 15 हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। योजना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान जारी है। तहसील व ब्लॉक मुख्यालयों पर विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं।
- स्मिता सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी