प्रख्यात इस्लामी विद्वान और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष हजरत मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि देश का हिंदू या मुसलमान देशद्रोही नहीं, बल्कि सरकार एवं प्रशासन में शामिल भ्रष्ट लोग देश को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। भ्रष्ट कभी देशप्रेमी नहीं हो सकता। उन्होंने शिक्षा-स्वास्थ्य के व्यवसायिकरण की भी आलोचना की।
मौलाना कल्बे सादिक गुरुवार को एएमयू के कैनेडी हाल में हजरत मुहम्मद साहब के जन्म दिवस पर आयोजित ईद मीलाद उन नबी समारोह में बोल रहे थे। उन्हाेंने कहा कि भ्रष्टचारी स्वयं से ध्यान हटाने के लिए दूसरे को देशद्रोही बता रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा के बढ़ते व्यवसायिकरण पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि तालीम बिकने की चीज नहीं। अमेरिका एवं यूरोप ने इसे बेचने का प्रयास किया। इसके चलते जो हश्र तालीम का हुआ, वहीं हश्र मजहब का हो रहा है। जब से मजहब बिजनेस बना है, तमाम तरह की बुराईयां आ गई हैं।
उन्हाेंने कहा कि देश की 40 करोड़ से अधिक जनता गरीबी रेखा से नीचे जी रही है। हमें निर्धनता एवं निरक्षरता से लड़ना चाहिए। समारोह में लखनऊ के मौलाना मुहम्मद याहया नोमानी ने कहा कि हजरत मुहम्मद साहब ने जो अर्थव्यवस्था अपनाई थी उसमें गरीब की परिकल्पना नहीं थी, पर आज पचास प्रतिशत से ज्यादा दौलत एक प्रतिशत लोगों के हाथ में आ गया है।
भारत में 81 प्रतिशत लोग पौष्टिक आहार की सुविधा से वंचित हैं। पूरी दुनियां में मानवता खतरे में है। उन्होंने कहा कि हथियार का व्यापार विश्व का बड़ा कारोबार बन गया है। बैंकिंग व्यवस्था भी गरीबों के हम में नहीं। समारोह की अध्यक्षता यूनानी मेडिसन संकाय के डीन और कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर नईम अहमद खान ने की। इस मौके पर बुशरा नाज की टीम और दानिश आरिफ व जकिया ने नातशरीफ पेश की।
मौलाना हबीब उल्लाह, प्रोफेसर तौकीर आलम फलाही, रजिस्ट्रार डॉ. असफर अली खान आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. नईम अहमद खान ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी में सीरत प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। जिसमें पवित्र कुरान की दुर्लभ पांडुलिपियों के साथ विभिन्न भाषाओं की सीरत की पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। प्रो. केए निजामी कुरानिक अध्ययन केंद्र द्वारा कैनेडी हाल के मैदान में इस्लामी खत्ताती की प्रदर्शनी लगाई गई।