स्टाफ का आरोप था कि बिना मरीज को देखे ही अंदाजे से कैसे दवा दी जा सकती है। वह भी तब जब बीमार डायबिटीज का पीडित है। इससे उसे नुकसान भी पहुंच सकता है। इसके बाद बीमार संतलाल पाल को स्टाफ से जुड़े लोग एक निजी अस्पताल में उपचार को ले गए। इस संबंध में रेल स्टाफ ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की है।
डॉक्टर कॉल के बाद भी बीमार यात्रियों व स्टाफ को उपचार न मिलने का मामला संज्ञान मे आया है। इसकी पूरी गहनता से जांच कराई जाएगी। भविष्य में किसी भी बीमार यात्री या स्टाफ को समय से चिकित्सकीय सुविधा मिले यह सुनिश्चित कराया जाएगा । लापरवाही पर विभागीय स्तर से कार्रवाई तय की जाएगी।- अमित कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे