सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि जंबो पैक मशीन में रक्तदाता द्वारा दिया गया रक्त डाला जाता है। मशीन में रक्त तेजी से घूमता है, जिससे प्लेटलेट्स अन्य रक्त घटक से अलग हो जाती हैं। अलग हुई प्लेटलेट्स को एक साफ प्लास्टिक बैग में एकत्र किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएं और सफेद रक्त कोशिकाएं रक्तदाता को वापस दे दीं जाती हैं। पूरी प्रक्रिया में लगभग डेढ़ से ढाई घंटे लगते हैं। जंबो पैक मशीन से 40 से 80 हजार तक प्लेटलेट्स एकत्र हो सकती हैं।
कब पड़ती है जंबो पैक की जरूरत
जंबो पैक की जरूरत शरीर में प्लेटलेट्स कम होने पर पड़ती है। इससे एक बार में 80 हजार तक प्लेटलेट्स बढ़ जाती है। गंभीर मरीजों को इसकी जरूरत पड़ती है। छोटे पैक में चार से पांच हजार प्लेटलेट्स होती हैं।
जंबो पैक मशीन जिला अस्पताल में इसी वर्ष मार्च में आई है। अभी तक इसके प्रयोग के लिए जरूरी एनओसी नहीं मिली है। जल्द उच्चाधिकारियों से बात कर एनओसी लेकर लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा।-डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ।