अमुवि बाबे सैयद पर चल रहे धरने में भाग लेते छात्र-छात्राएं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे धरने पर लापता हुए जेएनयू छात्र नजीब की मां फातिमा नफीस भी पहुंचीं। वक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता फहद अहमद ने भी छात्रों को संबोधित किया। इसके साथ ही छात्रों ने मानव श्रंखला बनाई। क्रमिक भूख हड़ताल भी जारी। भूख हड़ताल ने एएमयू प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। फातिमा नफीस ने धरने पर संबोधन करते हुए कहा कि जिन लोगों की औलादें नहीं हैं, वह औलाद खोने का दर्द नहीं समझ सकते हैं। आज पूरे देश में 150 से ज्यादा प्रदर्शन हो रहे हैं। घरों की महिलाएं सड़कों पर आ गई हैं, लेकिन यह संघी लोग ऐसी बातें करते हैं जिससे हमारी रूह तक जख्मी हो जाती है।
ऐसा लगता है कि इनके घर में मां, बहन, बेटियां नहीं हैं। इन्हें सोचना चाहिए कि कल आपके साथ भी जुल्म होगा। आज जहां हम बैठे हैं वहां आपकी मां बहनें भी बैठी होंगी। तब यहां से आपको देश निकाला दिया जाएगा। यह सीएए, एनआरसी हमें देश से बाहर करने के लिए लाया गया है तो यह जान लें कि हम कहीं नहीं जाएंगे। जहां हैं वहीं मरेंगे। इनका तो मरकर भी कोई निशान नहीं रहता, हम तो मरकर भी हिंदुस्तान में ही रहते हैं। जब मुसलमान बहुमत में आएंगे तो प्रधानमंत्री भी बनेंगे। तब इनको पता चलेगा कि दूसरे पर जुल्म करना क्या होता है। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस ने सारी हदें तोड़ दी हैं। बच्चों को बर्बरता से मारा पीटा है। फातिमा नफीस 15 दिसंबर की घटना में घायल छात्र तारिक से भी मिलीं।
इससे पहले वक्ता फहद अहमद ने कहा कि इन लोगों को सवाल पूछना अच्छा नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि मुसलमान सीएए का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि सीएए में होने वाले भेदभाव का विरोध कर रहे हैं। प्रताड़ित व्यक्ति किसी भी धर्म का हो उसे नागरिकता देने में कोई एतराज नहीं है। इसी के साथ क्रमिक भूख हड़ताल दूसरे दिन जारी रही। छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार, डीएसडब्ल्यू आदि के इस्तीफे की मांग की है। जिसके लिए 72 घंटे का समय दिया था। यह समय सीमा रविवार की रात को समाप्त हो रही है। इसके बाद छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।