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Aligarh: जगाने के लिए काफी है झांसी का हादसा..शायद अब टूटे अलीगढ़ के सुस्त सिस्टम की नींद

Sun, 17 Nov 2024 02:34 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

बेसमेंट में वार्ड बनाने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई हो। जिन अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है उन पर सील लगाई जाए। जहां आग से लड़ने के बंदोबस्त न हों उन सभी नर्सिंगहोम को बंद कराया जाए। बगैर मानक पूरे किए अस्पताल चलाने वालों के खिलाफ मुकदमा हो। लेकिन यह सब होगा तभी जब अधिकारियों को कमियां नजर आएंगी।
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दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में खराब पड़ा आग बुझाने का उपकरण - फोटो : संवाद
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विस्तार
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झांसी मेडिकल कालेज में आग लगने से हुई 10 बच्चों की मौत से शायद सो रहे सिस्टम की नींद टूट जाए। अफसर अस्पतालों में सुरक्षा के मानक चेक करने निकलें। शासन से भी लंबे चौड़े आदेश जारी हों। इन सब आदेश निर्देशों के शोर के बीच अलीगढ़ के भी सुस्त सिस्टम की नींद टूट ही जाएगी। हो सकता है बेसमेंट में वार्ड बनाने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई हो। 

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जिन अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है उन पर सील लगाई जाए। जहां आग से लड़ने के बंदोबस्त न हों उन सभी नर्सिंगहोम को बंद कराया जाए। बगैर मानक पूरे किए अस्पताल चलाने वालों के खिलाफ मुकदमा हो। लेकिन यह सब होगा तभी जब अधिकारियों को कमियां नजर आएंगी। मगर यहां तो अधिकारी केवल अच्छा-अच्छा ही देखते हैं और सब कुछ ठीक है कहकर लौट आते हैं।....इसकी वजह आप भी जानते हैं और हम भी।

अलीगढ़ में 200 अस्पतालों पर नहीं है फायर की एनओसी
लापरवाही की भी हद है। अलीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जो अस्पताल पंजीकृत हैं उनकी संख्या 450 है लेकिन 200 के पास फायर ब्रिगेड की एनओसी ही नहीं है। इससे साफ है कि यह अस्पताल सुरक्षा के मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। जबकि फायर ब्रिगेड विभाग द्वारा इन अस्पतालों को कई दफा नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लेकिन दमकल विभाग के अधिकारी भी केवल नोटिस-नोटिस खेलने में ही लगे हुए हैं। वह भी इससे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। 450 अस्पतालों में से केवल 250 पर ही एनओसी होना साफ बताता है कि अस्पतालों के मानकों में भारी गोलमाल है। नियम व शर्तों को माना ही नहीं जा रहा है। कई अस्पताल तो बेसमेंट तक में चल रहे हैं। जबकि दिल्ली की घटना के बाद अधिकारियों ने चेकिंग की थी। कुछ दिन तो हल्ला मचा बाद में सब शांत हो गए। इस बार भी ऐसा ही होगा। झांसी की घटना को लेकर सभी अस्पतालों में जांच कराई जाएगी। अफसर पहुंचेंगे और सब कुछ ओके बताकर लौट आएंगे।

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12 अस्पतालों के बेसमेंट में वार्ड

नोएडा की घटना के बाद प्राधिकरण और प्रशासन ने बेसमेंट में संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की थी। उस वक्त बारह अस्पताल भी ऐसे थे जिनकी ओपीडी या वार्ड बेसमेंट में थे। उस वक्ता दावा किया गया था कि इन सभी अस्पतालों को बंद करा दिया गया है। लेकिन कुछ दिन के बाद से ही यह अस्पताल फिर से शुरू हो गए थे। लेकिन अधिकारी फिर भी खामोश हैं। शायद इन्हें भी किसी बड़े हादसे का इंतजार है। बेसमेंट में अस्पताल नहीं चल सकते। यह सब सुरक्षा मानकों के खिलाफ है। लेकिन फिर भी अधिकारी आंखें मूंदे हैं। अब शायद इस बिंदु पर फिर से अधिकारी चेकिंग चेकिंग करेंगे।

15 नर्सिंग होम चल रहे तंग गलियों में, नहीं पहुंच सकतीं फायर ब्रिगेड
अलीगढ़ महानगर में 15 नर्सिंग होम ऐसे हैं जो तंग गलियों में चल रहे हैं। हादसा होने पर यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती है। इससे साफ है कि यह अस्पताल सुरक्षा के मानकों को पूरा नहीं करते लेकिन फिर भी धड़ल्ले से इनका संचालन हो रहा है। अग्निशमन अधिकारी बन्ना देवी संजीव कुमार सिंह का कहना है कि इन अस्पतालों की रिपोर्ट सीएमओ को भी दे दी गई है। कई बार नोटिस भी जारी किए गए लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। तंग गलियों में चलने वाले अस्पताल ऊपरकोट, जीटी रोड, देहली गेट, खैर बाईपास, सासनी गेट और एटा चुंगी इलाके में हैं। कुछ अस्पताल तो ऐसी गलियों में चल रहे हैं कि वहां अगर एक साथ दो बाइक निकलने लगें तो टकरा जाएं।
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प्रशिक्षित स्टॉफ तक नहीं

जिन अस्पतालों के पास आग से लड़ने के संसाधन हैं वहां प्रशिक्षित स्टॉफ तक नहीं है। अग्निशमन यंत्र को कैसे चलाया जाए यह उन्हें पता ही नहीं होता है। आग लगने पर सबसे पहले क्या करें उन्हें बताया ही नहीं गया होता है। होना तो यह चाहिए कि बड़े संस्थानों में रेत भी होना चाहिए। इससे आसानी के साथ आग को काबू किया जा सकता है। लेकिन कई जगह से लड़ने के संशाधन ही नहीं होते।

सभी को नोटिस दिए जा रहे हैं
अलीगढ़ के एफएसओ संजीव कुमार सिंह का कहना है कि जिन अस्पतालों के पास एनओसी नहीं है उन सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अगर यह जल्द ही सुरक्षा के मानकों को पूरा नहीं करेंगे तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मानकों को पूरा न करने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाई
सीएमओ डा. नीरज त्यागी का कहना है कि जिन अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है उन्होंने आवेदन कर रखा है। जल्द ही सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मानकों को चेक करने के चेकिंग करेगी। जो भी कमियां होंगी उन्हें पूरा कराया जाएगा।
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