13 वर्ष बाद अलीगढ़ के चंडौस में मिले आगरा के जीतू को अपने साथ ले जाते परिजन। संवाद
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आगरा के खंदौली से 13 साल पहले लापता हुआ मानसिक रूप से अस्वस्थ जीतू प्रजापति 14 जुलाई को चंडौस में मिला। गभाना सीओ रंजन शर्मा के हमराही तेेज प्रकाश लवानिया ने कस्बे के बाजार में देखा तो तत्काल फोटो खींचकर परिजनों के पास भेजा। इसके बाद मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे जीतू के भाई और चाचा सहित पड़ोसी सुधीर शर्मा कस्बे में पहुंचे और उसे अपने साथ गांव ले गए।
परिजनों के अनुसार करीब 13 वर्ष पहले खंदौली गांव से एक बरात मथुरा के राया आई थी। कुछ बरातियों ने उसे भी अपने साथ बस में बिठा लिया था। उस समय उसकी उम्र करीब 23 वर्ष थी। लौटते समय बराती उसे राया में ही छोड़ गए। उसके न लौटने पर परिजन राया आए और तलाश की लेकिन पता नहीं चला। इसके बाद नौहझील में होने की खबर लगी तो वहां भी तलाशा लेकिन वह नहीं मिला। थक-हारकर परिजनों ने भी तलाश बंद कर दी।
14 जुलाई को चंडौस में मोर्हरम से पहले छड़ी का जुलूस में सुरक्षा की दृष्टि से सीओ गभाना की भी ड्यूटी लगी थी। उनके हमराही तेज प्रकाश लवानिया ने उसे पहचान लिया था। जब यह फोटो जीतू के भाई गुरुनाम और चाचा पप्पू के पास पहुंची तो उन्होंने तत्काल उसे पहचान लिया। मंगलवार को परिजनों के पहुंचने के बाद परिजनों और दुकानदारों ने पहले जीतू को नहलाया। इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनाए। बताया कि कोरोना काल में जीतू के माता-पिता की मौत हो चुकी है। आठ भाई-बहन में छठवें नंबर पर है। इसके बाद परिजन उसे अपने साथ ले गए।
जाबिर अली खिलाते थे खाना, उन्हीं के दरवाजे सोता था
चंडौस में बाजार के निवासियों ने परिवार वालों को बताया कि वह अपना नाम नहीं बता पा रहा था। इस पर लोगों ने उसका नाम धर्मपाल रख दिया था। कस्बा निवासी जाबिर अली ही 13 वर्ष से दोनों समय जीतू को खाना खिला रहे थे। उन्हीं के दरवाजे पर वह सोता था।