गांव कसीसों में रंजिश के चलते कुछ लोगों ने 35 वर्षीय एक जेई की गोली मार कर हत्या कर दी। वारदात उस समय हुई जब वह अपने घर के बाहर बैठा था। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने उसेे मेडिकल भिजवाया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना को लेकर परिजनों व ग्रामीणों में खैर पुलिस के प्रति गहरा आक्रोश है। इस क्रम में जेई के परिजनाें ने मेडिकल में हंगामा भी किया जिन्हें सिविल लाइन पुलिस ने किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया।
बता दें कि कसीसों निवासी कृष्णा पुत्र श्यामसुंदर पूना में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में जेई के पद पर कार्यरत था। उसकी पत्नी व दो बच्चे दिल्ली में रहते हैं। वह अपनी मां मोहिनी देवी से मिलने रविवार की दोपहर अपने छोटे भाई वीकेश के साथ गांव आया हुआ था।
शाम साढ़े छह बजे वह होली चौक स्थित अपने मकान के द्वार पर बैठा था कि गांव के ही तीन चार हमलावरों ने उस पर गोलियों की बरसात कर दी। कृष्णा के मुंह व गर्दन में तीन गोली लगी है। काफी देर तक उसकी मां उसे गोद में लेकर रोती रही। सूचना पर इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे तथा उसे मेडिकल भिजवाया। सीओ ओपी सिंह का कहना है कि मृतक पक्ष का मौसेर भाईयों से न्यायालय में जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। उस को लेकर इस घटना को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
पुलिस करती कार्रवाई तो नहीं होती हत्या
खैर। मृतक के परिजनों की बातों पर गौर करें तो तो खैर पुलिस ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। यदि पुलिस कार्रवाई करती तो घटना को टाला जा सकता था। मृतक के भाई अनिल व बहनोई गोपाल दत्त शर्मा ने बताया कि गांव में परिजनों से मकान व जमीन को लेकर पिछले कई वर्षो से रंजिश चल रही है। वर्ष 2001 में मृतक के बड़े भाई अनिल पर जानलेवा हमला हुआ था। इसमें तो वह बच गया, लेकिन गोली लगने से एक हाथ बेकार हो गया । मामले में उस समय अनिल के पिता श्यामसुंदर ने मौसेरे भाई कृष्ण गोपाल व उसके पुत्र सुशील के विरुद्व रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मामला फिलहाल हाईकोर्ट में है। इसमें मृतक कृष्णा गवाह था। आरोप है कि आरोपी फैंसले के लिए दबाब बना रहे थे। जिसकी शिकायत एसएसपी से लेकर डीआईजी तक से की गई थी। विधि प्रकोष्ठ को भी पत्र लिखा गया था। यहां तक कि कई बार परिजन खैर इंस्पेक्टर से मिलकर कार्रवाई करने की भी गुहार लगाई थी, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। यदि पुलिस ने सुनी होती तो कृष्णा आज जीवित होता।