विजयदशमी का पर्व मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। श्रीराम लीला महोत्सव की ओर नुमाइश मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाद दहन लीला का मंचन हुआ।
श्रीराम वानर सेना के साथ जैसे ही नुमाइश मैदान में पहुंचे तो जय श्रीराम - जय श्रीराम का जयघोष होने लगा। यहां पर श्रीराम और रावण की सेना में भीषण युद्ध हुआ।
वानरों ने राक्षसों को एक एक कर मारा। हनुमान ने भी कई राक्षसों का अंत किया। बार बार तीर मारने के बाद भी जब रावण का अट्टाहस जारी रहा तो श्रीराम की सेना में चिंता हो गई।
इस पर सखा विभीषण की राय पर रावण की नाभि को निशाना बना कर जैसे ही प्रभु श्रीराम ने तीर चलाया तो रावण का पुतला तेज आवाजों के साथ धूं-धूं करके जलने लगा।
विभीषण ने बताया था कि रावण की नाभि में अमृत है। रावण के साथ ही मेघनाद और कुंभकरण के पुतले भी आतिशबाजी की रंगीन रोशनी और बमों के धमाकों के साथ जलने लगे। एक बार फिर से जयश्री राम का जयघोष हुआ।
श्रद्धालुआें को मेला और पुतला दहन देखने में परेशानी न हो इसके लिए कई बड़ी स्क्रीन भी नुमाइश मैदान में लगाई गई थी,जिस पर लीला मंचन सीधे दिखाया जा रही थी। तीनों पुतलों की आतिशबाजी देखने लायक थी। इस दौरान नुमाइश मैदान में जबरदस्त भीड़ रही। पुलिस प्रशासन ने यहां की सुरक्षा भी बहुत कड़ी कर दी थी।
पुतलों के दहन होने के बाद मेला वापस जीटी रोड से होता हुआ रामलीला मैदान पहुंचा। इस दौरान विमल अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, संदीप रंजन गुप्ता, ऋषि मित्तल, अतुल कुलश्रेष्ठ, शैलेंद्र अग्रवाल, गोपाल, गोपाल वार्ष्णेय, चंद्र भान, अर्जुन गोविल, सुनील गर्ग, मानव महाजन पवन खंडेलवाल, पवन गुप्ता आदि मौजूद रहे।