कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक करते डीएम चंद्रभूषण सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग की भारी लापरवाही सामने आई है। 14 सितंबर को संक्रमित मिले 194 कोविड मरीजों को 48 घंटे बाद यानि 16 सितंबर तक आईसोलेट ही नहीं कराया गया। मुख्य विकास अधिकारी अनुनय झा ने बुधवार को समीक्षा बैठक के दौरान इस लापरवाही की पोल खोल दी। डीएम ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को खूब खरी सुनाईं। इस पर विभाग के अधिकारी बगलें झांकने लगे।
कलक्ट्रेट परिसर में डीएम चंद्रभूषण सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि 14 सितंबर के 194 मरीजों को होम आईसोलेट/कोविड एल-1 या एल-2 में आईसोलेट नहीं किया गया है। संक्रमित मरीजों का डाटा भी डीएसओ पोर्टल पर समय से अपलोड नहीं किया गया। इसके चलते प्राथमिक संपर्कियों की ट्रेसिंग का कार्य भी प्रभावित हुआ है। डीएम का यह बात सुनकर पारा चढ़ गया। उन्होंने सीएमओ को बीपी सिंह कल्याणी को निर्देश दिए कि किसी भी हाल में इस प्रकार की लापरवाही आगे से न हो जाए। वहीं, उन्होंने दीन दयाल अस्पताल स्टाफ बढ़ाए जाने व अस्पताल के आईसीयू वार्ड में अस्पताल के ही डाक्टर रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि आईसीयू वार्ड को छोड़कर अन्य सभी वार्डों में एमओआईसी की तैनाती की जाए।
कोरोना जांच कराने जाएं, तो आधार कार्ड साथ ले जाएं
कोरोना जांच कराने के लिए अब संदिग्ध मरीज को पहले अपने आधार कार्ड का ब्योरा दर्ज कराना होगा। इसके बाद मरीज की जांच होगी। संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग के दौरान नाम-पते लिखने में हो रही गड़बड़ी को देखते हुए डीएम ने यह निर्णय लिया है। डीएम ने कहा कि तत्काल प्रभाव से यह आदेश सभी जांच केंद्र और रैंडम सैंपलिंग के लिए जा रहीं टीमों पर लागू रहेगा। जनता से अपील है कि जांच के दौरान आधार कार्ड का ब्योरा जरूर दर्ज कराएं। डीएम ने बताया कि जो व्यक्ति जिस क्षेत्र का है, उसकी जांच उसी क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर होगी। आधार कार्ड अनिवार्य होगा। इसके साथ ही अब दीनदयाल व मलखान सिंह में एंटीजन किट से जांच नहीं होगी। इन दोनो अस्पतालों में सिम्टोमेटिक जैसे सर्दी, जुखाम, खांसी के लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों की आरटीपीसीआर जांच होगी।