रिमोट कंट्रोल से पेट्रोल व डीजल के डिस्पेंसर यूनिट संचालित करने का खुलासा होने के बाद पंप संचालकों में खलबली मची है। पेट्रोल और डीजल लेने वालों का अब एक ही सवाल है कि कहीं रिमोट तो नहीं लगा है..? वहीं अब तक पेट्रोलियम कंपनियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कोई भी संयुक्त चेकिंग नहीं हुई है। केवल रूटीन चेकिंग की जा रही है। जिला पूर्ति निरीक्षक नीरज सिंह ने बताया कि बांट माप निरीक्षक कम होने की वजह से शेडयूल के अनुसार चेकिंग नहीं हो रही है। इधर, गभाना में रविवार को तयशुदा शेडयूल में चेकिंग नहीं हुई है।
ये भी जानें
वर्ष 1932 में नौरंगराय जैन ने अलीगढ़ में खोला था पहला पेट्रोल पंप
वर्ष 1960 में अलीगढ़ और हाथरस में लगभग 24 पेट्रोल पंप हुआ करते थे
वर्ष 2017 में अलीगढ़ में ही 155 पेट्रोल पंप संचालित हैं
पंप को ईंधन किलोलीटर में मिलता है, एक किलो लीटर में एक हजार लीटर तेल
पेट्रोलियम डिस्पेंसर मशीन में रिमोट कंट्रोल से चोरी कैसे हो सकती है ये जानने के लिए मैं भी उत्सुक हूं। वर्ष 1932 से 2017 हो गया है। गुजरे 85 साल से मेरे परिवार में ये कारोबार हो रहा है। आज तक मैंने नहीं देखा कि रिमोट से ऐसा कुछ हो सकता है। अगर ये हो रहा है तो इस पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो बेवजह किसी को फंसाना नहीं चाहिए। वर्ष 1932 में गैलन के रेट से पेट्रोल दिया जाता है, एक गैलन में साढ़े चार लीटर ईंधन होता था। अब एक आधुनिक तकनीकी आने वाली है, जिसमें पेट्रोल देने वाली डिस्पेंसर यूनिट पूरी तरह से सील होगी। एक बार खराब होने के बाद उसका दोबारा से इस्तेमाल नहीं होगा। अगर ऐसा हुआ तो चोरी की संभावना न के बराबर रह जाएगी। ऐसी तकनीकी जल्द से जल्द आनी चाहिए।
-वेद प्रकाश जैन, पेट्रोल पंप मालिक
पेट्रोलियम कारोबार कर रहे सभी लोग एक जैसे नहीं है। अधिकांश लोग ईमानदारी से ही काम कर रहे हैं। रिमोट कंट्रोल वाली घटनाओं ने सबके दामन पर दाग लगा दिया है। पंप पर पहुंचने वाले लोग एक ही सवाल करते हैं कि कहीं रिमोट तो नहीं लगा है। मैं कहता हूं कि जहां चोरी हो रही है, उसके साथ कोई हमदर्दी न बरती जाए। एसोसिएशन भी उसके साथ ही नहीं है। लेकिन जहां सही काम हो रहा है उसको बदनाम न किया जाए।
-विजय मंगल, अध्यक्ष अलीगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन