अलीगढ़ के स्लॉटर हाउसों से भैंस का हड्डी युक्त और हड्डी रहित मांस, चर्बी, पांव की नसें और शरीर के अन्य अंगों का निर्यात किया जाता है। इसमें हड्डी रहित मांस की मांग सबसे अधिक है, जिसे 25 किलो के पैकेट में पैक कर भेजा जाता है। मांस के साथ बाय-प्रोडक्ट्स जैसे जानवरों की चर्बी का उपयोग दवाइयां, तेल और मुर्गी का दाना बनाने में होता है, जिसका बड़ा बाजार विदेशों में है।
इन बड़ी कंपनियों पर पड़ा असर
अलीगढ़ में मीट निर्यात का कारोबार मुख्य रूप से सात बड़ी इकाइयों के इर्द-गिर्द घूमता है, जिनमें एलाना ग्रुप, फेयर एक्सपोर्ट, अल-हम्द फूड एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, अल दुआ, एचएमए, अल हसन, अल अम्मार शामिल हैं।
अलीगढ़ ही क्यों है बड़ा केंद्र
अलीगढ़ में मीट उद्योग के फलने-फूलने के पीछे यहां की भौगोलिक स्थिति और संसाधन हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से पशुओं का परिवहन यहां आसानी से हो जाता है। इसके अलावा, यहां भूसा, हरा चारा और कुशल श्रमिकों की प्रचुर उपलब्धता है, जो इसे उत्पादन का एक बेहतरीन केंद्र बनाती है।
आंकड़ों में अलीगढ़ का मीट निर्यात
- वर्ष -2020-21- 5000 करोड़
- वर्ष 2021-22- 5609 करोड़
- वर्ष 2022-23- 6687 करोड़
- वर्ष 2023-24 - 7100 करोड़
- वर्ष 2024-25 - 7400 करोड़