वैश्विक स्तर पर व्याप्त अनिश्चितता, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर पारंपरिक निवेश के सुरक्षित विकल्प यानी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर लौट आया है। लोग शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की तुलना में अब बैंकों में एफडी कराना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
अलीगढ़ जिले के बैंकिंग आंकड़ों पर नजर डालें तो निवेश के पैटर्न में यह बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है। अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच जिले के कुल बैंक डिपॉजिट में एफडी की हिस्सेदारी 60 से बढ़कर 65 फीसदी तक पहुंच गई है। पांच फीसदी की इस वृद्धि से बैंकों को जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने ग्राहकों को इसके लिए और प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। इसकी मुख्य वजह एफडी पर मिलने वाली ऊंची ब्याज दरें और निवेश की सुरक्षा है। इसी वजह से छह महीने में पांच फीसदी का उछाल आया है। यह उछाल दर्शाता है कि लोग अब जोखिम भरे निवेश से किनारा कर रहे हैं।
वित्तीय सलाहकार दुर्गेश अग्रवाल के अनुसार म्यूचुअल फंड में निवेश पूरी तरह से बाजार के जोखिमों के अधीन होता है। म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों का पैसा आईटी, पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विभिन्न सेक्टरों में लगातीं हैं। यदि इन सेक्टरों में गिरावट आती है तो इसका सीधा असर निवेशक के मुनाफे पर पड़ता है। बाजार की इसी अस्थिरता को देखते हुए लोग अब गारंटी वाला रिटर्न चाहते हैं, इसीलिए फिक्स्ड डिपॉजिट का चलन बढ़ रहा है।