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Court: अदालत से लग रही पुकार, हाजिर नहीं हो रहे विवेचक और थानेदार, मुकदमों के निस्तारण में हो रही देरी

Tue, 04 Feb 2025 04:59 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ जिले की दीवानी स्थित अदालतों से विवेचक रहे थानेदार व अन्य पुलिसकर्मियों-अधिकारियों को लगातार समन, वारंट जारी हो रहे हैं। मगर सुदूर तबादलों और ड्यूटी में व्यस्तता के चलते पुलिस के ये गवाह समय से हाजिर नहीं हो पा रहे और मुकदमों के निस्तारण में देरी हो रही है।
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कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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कहने को त्वरित न्याय के लिए बीते वर्ष कानून में कुछ बदलावों के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) को लागू किया गया। अदालतों में भी महिला व अन्य संगीन अपराध के मुकदमों को तेजी से निस्तारण की प्रक्रिया चल पड़ी है। मगर जिन पुलिस कर्मियों की गवाही से अपराधी को सजा का रास्ता तय होता है, बड़ी संख्या में ऐसे पुलिसकर्मी समय से गवाही देने नहीं पहुंचते। 

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अलीगढ़ जिले की दीवानी स्थित अदालतों से विवेचक रहे थानेदार व अन्य पुलिसकर्मियों-अधिकारियों को लगातार समन, वारंट जारी हो रहे हैं। मगर सुदूर तबादलों और ड्यूटी में व्यस्तता के चलते पुलिस के ये गवाह समय से हाजिर नहीं हो पा रहे और मुकदमों के निस्तारण में देरी हो रही है।

ये सही है कि पुलिस विवेचक दूसरे जिलों में तबादले के बाद समय से सूचना के बाद भी गवाही को नहीं आते। ऐसे में मुकदमों के निस्तारण में देरी होती है।-चौ.जितेंद्र सिंह, डीजीसी फौजदार

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ये हैं ऐसे कुछ मामले

  • केस एक: गोंडा के तीन वर्ष पुराने हत्या के मुकदमे में सेवानिवृत्त दरोगा केशपाल सिंह सात माह से लगातार समन व पत्राचार के बाद भी नहीं आए। अदालत ने उनकी आधी पेंशन रोकने तक का आदेश दे दिया। उनकी गवाही हटाकर अगली गवाही शुरू कर दी। अब उनका पत्र मिला है कि वे बीमार हैं और पंद्रह फरवरी तक हाजिर हो पाएंगे।
  • केस दो: अकराबाद के सात वर्ष पुराने हत्या के मुकदमे में विवेचक रहे फिरोजाबाद में तैनात एसएचओ संजीव दुबे भी दो वर्ष से समन व सूचना पर नहीं आए। हाईकोर्ट से मुकदमा त्वरित निस्तारण का आदेश है। मगर उनके न आने के कारण मुकदमा निस्तारित नहीं हो पा रहा है।
  • केस तीन: शहर के बीस वर्ष पुराने किशोरी के अपहरण दुष्कर्म के मुकदमे में तत्कालीन सीओ से डीजी प्रोन्नत हुए आईपीएस विजय सिंह मीणा को लगातार समन व पत्राचार से बुलाया गया। जब वे नहीं आए तो उनकी गवाही का मौका खत्म कर दिया गया।
  • केस चार: क्वार्सी में लूट व दोहरी हत्या के विवेचक अब सीओ सरधना मेरठ संजय जायसवाल भी नहीं आ रहे। लगातार समन पर उन्होंने ऑनलाइन गवाही की अर्जी दी, जिस पर बचाव पक्ष ने एतराज किया है। अब अदालत ने एसएसपी मेरठ को छह फरवरी को उन्हें हाजिर कराने को पत्र लिखा है।

ये तथ्य भी जानें
एसपीओ सत्यानंद सिंह बताते हैं कि एक जुलाई से बीएनएस लागू होने के बाद वीडियो कांफ्रेंसिंग से गवाही की व्यवस्था लागू है। अगर दूसरे जिले से पुलिस विवेचक वीसी से गवाही देना चाहते हैं तो होती है। मगर जो सेवानिवृत्त हो गए और जिनके पते नहीं मिल रहे। उनकी गवाही न होने से मुकदमे अटक जाते हैं। कुछ में उनकी गवाही का मौका खत्म करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। सीजेएम अदालत में आधा दर्जन मुकदमे हाल ही में गवाही का मौका खत्म कर आगे बढ़ाए गए हैं।

ये है स्थिति
  • 400 से अधिक पुलिसकर्मियों के समन-वारंट हैं जारी
  • 100 से अधिक पुलिसकर्मी लंबे समय से नहीं आ रहे
  • 1200 करीब मुकदमे इस वजह से निस्तारण को लंबित
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