प्रदेश की सियासत में भूचाल लाने वाले 28 वर्ष पुराने जिले के बहुचर्चित नगला परसी दुष्कर्म-डकैती कांड में बृहस्पतिवार को विवेचक की गवाही शुरू हो गई है। इस मामले में अभी जिरह पूरी न हो पाने के कारण अब 31 तारीख नियत की गई है। वहीं, एक गवाह पूर्व विधायक पुत्र रजनेश यादव को गवाही से उन्मोचित किया गया है। बता दें कि मुकदमे का ट्रायल एडीजे विशेष एससी एसटी की अदालत में चल रहा है।
वर्ष 1994 में दादों के गांव नगला परसी के एक ईंट भट्ठा पर हुए इस कांड में लूटपाट के लिए आए आरोपियों पर भट्ठा मजदूरों की झोंपड़ियों में घुसकर डाका डालने व दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। सपा शासनकाल में यादव बहुल क्षेत्र में हुए इस सनसनीखेज कांड में थाना पुलिस पर मुकदमा दर्ज न करने का आरोप लगा था। खबर पर तमाम सियासी दिग्गज मौके पर पहुंचे थे और मुकदमा दर्ज हुआ था। तत्कालीन एसओ को निलंबित किया गया था। एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार, इस प्रकरण में अब तक पीड़ित पक्ष के 9 गवाह पेश हो चुके थे। 10वीं गवाह दुष्कर्म पीड़ित को 7 वर्ष बाद पिछली तारीख पर पेश किया गया। उसकी गवाही के बाद अब विवेचक रहे तत्कालीन एसओ व सेवानिवृत्त डीएसपी घनश्याम सिंह को तलब किया गया। वे गवाही देने पहुंचे। अभी उनसे जिरह शेष है। इसलिए फिर 31 तारीख को तलब किया गया है। इस दौरान एक अन्य गवाह पूर्व विधायक पुत्र रजनेश यादव तलब थे। मगर उनके पुलिस को दिए बयानों से पलटने के कारण गवाही से उन्मोचित किया गया है। एडीजीसी के अनुसार विवेचक की गवाही के बाद दूसरे विवेचक रहे सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर को तलब किया जाएगा।